झांसी के गुरसरांय कस्बे में लोग इस तरह भरते हैं पानी, पेयजल किल्लत ने बिगाड़ी दिनचर्या

गुरसरांय (झांसी न्यूज़)। नगर में दिन प्रतिदिन गर्मी की प्रकोप से जिले से लेकर कस्बे और गांव में दिन प्रतिदिन जलस्तर गिरता जा रहा है, और लोग प्यास के मारे भटकते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन फिर भी जल संस्थान द्वारा गुरसरांय नगर के हेडपम्पो को नही सुधारा जा रहा है, और न ही नगरपालिका द्वारा मुहल्लों में टैंकरों की सप्लाई समय से की जा रही है

कभी दिन में 2 बजे टैंकर आ जाये या फिर कभी रात में 9 बजे बच्चे और महिलाएं दिन में टैंकरों के आने का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन कभी लोग तेज धूप में टैंकर से पानी भरते हैं, तो कभी रात में जाग कर के टैंकरों के आने का कोई समय नही है, जिससे लोग अपना काम धंधा छोड़कर सिर्फ और सिर्फ पानी के लिए टैंकरों का घंटो इंतजार करते रहते हैं, लेकिन टैंकर समय से नही आता और लोग निराश होकर के घर लौट जाते हैं। और जब टैंकर आता भी है तो चंद मिनटों में खाली हो जाता है।

अब बात की जाए गुरसरांय नगर के जल संस्थान की गर्मी के मारे लोगो का बुरा हाल है। लोग बसों से पैदल चलकर प्याऊ और नल तलाशते हुए नजर आते हैं, लेकिन लोगो को नल मिलता है, तो वह भी खराब जिससे लोगो मे जल संस्थान और कर्मचारियों के विरुद्ध लोगो मे गुस्सा देखा जा सकता है। गर्मी के इस मौसम में लोगो के लिए हेडपम्प ही एकमात्र साधन हैं, जिससे बसों से आने जाने बाले यात्री हेडपम्प पर अपनी प्यास बुझा सके, लोगो ने मोदी चौराहा कटरा बाजार धनाई मुहल्ला में ऐसे ही कई मुहल्ले और चौराहों पर करीब सौ से ज्यादा हेडपम्प खराब पड़े हैं। जो अब लोगो की प्यास तक नही बुझा पा रहे हैं। यह खराब हेडपम्प अपनी दयनीय हालत पर आंसू बहा रहे हैं, और जनता प्यास के मारे इधर उधर भटकती हुई नजर आ रही है, लेकिन फिर भी जल संस्थान के अधिकारी अपनी बाह बाही लूटने में लगे हुए हैं।

शुक्र तो नगरपालिका का है, कि नगरपालिका द्वारा समय से ही गर्मी की मार झेल कर प्यासे भटक रहे लोगो के लिए प्याऊ लगाया गया था। जिससे लोग को प्याऊ से कुछ राहत मिली है ,और लोग नगरपालिका द्वारा लगाए गए प्याऊ की तारीफ करने से नही चूक रहे है,लेकिन जब यह प्याऊ शाम होते ही बंद हो जाता है, तो लोग हेडपम्प तलाशने लगते है,और जब हेडपम्प मिलता भी है तो बो भी सूखा, बमुश्किल से उसमे से एक दो घूंट पानी निकलता है।  जिससे प्यासे भटक रहे लोगो की प्यास तक नही बुझ पाती। मजबूरी में लोगो को 20 रुपय की पानी की बोतल या फिर 2 रुपय का पानी पाउच पीने के लिए खरीदना पड़ता है। यह बात जल संस्थान के अधिकारी जानकर भी कुम्भकर्णी नींद में सोए हुए हैं। जनता प्यास के मारे बेहाल हैं।

अगर जल संस्थान द्वारा यह हेडपम्प समय से सुधरवा दिए गए। तो इससे गुरसरांय की जनता को पीने के पानी और खर्च के पानी के लिए दर दर नही भटकना पड़ेगा। बर्तमान में गुरसरांय की जनता टैंकरों के और गरौठा विधायक द्वारा बनाई गई छोटी छोटी टंकियों पर निर्भर है, और गुरसरांय में एकमात्र पानी की टंकी है, जो 50 हजार की आबादी की प्यास बुझाने का प्रयास कर रही है, लेकिन फिर भी गुरसरांय की जनता की प्यास बुझ तक नही पा रही है। क्योंकि गुरसरांय में सेकड़ो से ज्यादा हेडपम्प खराब पड़े हैं, और न ही नलो में सुचारू रूप से जल आपूर्ति की जा रही है। जिससे लोग सिर्फ और सिर्फ टैंकरों और छोटी छोटी पानी की टंकियों पर ही निर्भर है।

कभी कभी तो जब दिन में टैंकर नही आता है,तो लोगो मे पीने के पानी तक को मोहताज हो जाते हैं ,और लोग मजबूरी में अपने पैसो से करीब 300 रुपय का उपयोगी टैंकर मंगाते है, और उससे ही अपने पानी के खर्च की पूर्ति करते हैं,अमीर आदमी तो पैसो से टैंकर मंगा लेते हैं,

लेकिन गरीब आदमी और जनता तो सिर्फ और सिर्फ नगरपालिका और जल संस्थान पर ही निर्भर है, गुरसरांय की जनता चाहती है कि समय से टैंकरों की आपूर्ति होती रहे,और समय से जल आपूर्ति होती रहे, और समय से नगर में खराब पड़े हेडपम्पो को सुधारबया जाए,जिससे गर्मी के इस मौसम में पानी के लिए दर दर नही भटकना पड़े।

रिपोर्ट : अजय वर्मा

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