प्रत्येक जीव पारीछत- नीलम गायत्री

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मऊरानीपुर (झांसी) पारीछत कृपा से ही भागवत कथा सुनने को मिलती है, हर जीव पारीछत है, जिसकी मृत्यु सात दिनों में ही तय है, मृत्यु का कोई समय नही होता पर मृत्यु समय से होती है।

आंनद आश्रम कालभैरवं मंदिर में चल रहे रुद्र महायझ एवं भागवत कथा के दौरान व्यास गद्दी से उक्त उद्गार कथा व्यास नीलम गायत्री ने व्यक्त करते हुये कहा कि सुख का समय कितनी जल्दी बीत जाता है पता ही नही चलता लेकिन दुख का एक एक पल एक एक साल की तरह बीतता है। ऐसे में प्रत्येक जीव को परमात्मा का ध्यान करना चाहिये जिससे दुख में भी सुख का अनुभव होता है।

धारा प्रवाह प्रवचन में बताया कि यदि सुख नही रहता है तो दुख भी नही रहता है, दोनों के आने जाने का क्रम लगा रहता है। परमात्मा को याद करने से वह दया करते है, समय पर बोलते हुये कहा कि सब कुछ रोका जाता है पर समय को नही, क्योंकि समय अबाध गति से चलता रहता है।

प्रत्येक जीव को समय के अनुसार चलना चाहिये, यदि जीवन में कुछ भी बुरा घटित हो रहा हो तो यह मान लेना चाहिये कि आगे कुछ अच्छा होने वाला है, विदुर, धृतराष्ट गांधारी कथा के माध्यम से बताया कि अन्याय अत्याचार का भी समय बहुत कम होता है, इसक समय पर उचित विरोध अवश्य करना चाहिये।

प्रवचन में बताया गया कि महाभारत के समापन पर श्री कृष्ण अपनी लीला पूरी कर सूक्ष्म में चले गये तो पाण्डव भी द्रोपती के साथ महाप्रयाण कर गये और राज सिहांसन पर पारीछत को बैठाया गया।

जिन्हौंने भूलवश तपस्वी श्रृषि के गले में सर्प डाल दिया यह देख उनक पुत्र ने पारीछत को श्राप दे डाला कि तेरी मृत्यु सात दिनों के भीतर हो जायेगी।

जब पारीक्षत को अपनी गल्ती का अहसास हुआ तो वह सुकदेव की शरण में चले गये उनसे पूंछा कि मृत्यु पूर्व क्या करना चाहिये क्या नही, तब कहीं जाकर सुकदेव ने उन्हैं मोक्ष का रास्ता बताया। कलियुग पर बोलते हुये कहा कि जब जुआ, शराब, वेश्यावृत्ति एवं गौ हत्या होने लगे तो समझ लेना चाहिये कि कलियुग सामने है।

इसके अलावा कृष्ण जन्म और कंस वध के बारे में विस्तार से बताया, आरती पारीछत बने राजकुमार तिवारी ने सपत्नीक की, इस मौके पर प्रभू दयाल झा, रागनी, मंहत देवेन्द्र कुमार शुक्ल अमित पाण्ड्ेय, नरेश शुक्ला, राम जी तिवारी, शांतिशंरण चतुर्वेदी,

प्रमुख पुजारी रोहित चतुर्वेदी, बाल पण्डित लवकुश तिवारी, अमन दीक्षित, राकेश सेठिया, रानीराय, देवेन्द्र पटेल, पुरुषोत्तम राय, मुकेश अग्रवाल, अखिलेन्द्र ठाकुर, प्रधान चुरारा, शिवंशंकर चतुर्वेदी, कुलदीप पटैरिया, रज्जन सिंह यादव, गौरव तिवारी, अरुण पटेल, जमुना प्रसाद पटेल, सौरभ तिवारी, सानू, राजा गौर, हरिश्चंद्र पटेल, सत्य प्रकाश सूरौठिया, लवकुश सांनी, किदारी लम्बरदार, दशरथ यादव,  रहीस यादव रेवन आदि मौजूद रहे, कथा उपरांत गंगा जी की मूर्ति के समक्ष 21 सौ दीपदान किये गये।

रिपोर्ट- रवि अग्रवाल रठा

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