खादी ग्रामोद्योग ने दिया कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक, चलाना हो रहा मुश्किल

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कुम्हारी कला के लिए मील का पत्थर है विद्युत चालित चाक, खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा कुम्हारों को दिया जा रहा कौशल प्रशिक्षण

कोंच(जालौन)। आधुनिकता की चकाचौंध में विलुप्त होती जा रही कुम्हारी कला को बढाबा और संरक्षण देने के लिए सरकार कुम्हारों को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से मिट्टी के वर्तन व अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देने का काम कर रही है जिसके तहत औद्योगिक आस्थान में दस दिवसीय कुम्हारी कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर जारी है जिसमें नगर के तकरीबन चालीस प्रतिभागी बाहर से आए तकलीकी बिशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लखनऊ से आए प्रशिक्षक जयराम बताते हैं कि विद्युत चालित चाक कुम्हारी कला में किसी मील के पत्थर से कम नहीं है, इससे मिट्टी के वर्तन जल्दी बनाये जा सकते हैं तथा सुंदर और आकर्षक मूर्तियों का निर्माण किया जा सकता है। गणेश, लक्ष्मी आदि देवी देवाताओं के अलावा हिरन, हाथी, घोड़ा आदि की आकृतियां बनाना प्रशिक्षुओं को सिखाया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुम्हारों को शासन की ओर से विद्युत चालित चाक नि:शुल्क वितरित किए जाएंगे जिससे कुम्हार मिट्टी के वर्तन आदि बनाकर अपनी आजीविका शुरू कर सकेंगे। शिविर का समापन 8 जून को होगा। इस दौरान नरेशचंद्र पटेल, शालिगराम, भगवान सिंह, प्रमोदकुमार आदि मौजूद रहे।

रिपोर्ट : दुर्गेश कुशवाहा

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