झाँसी के इस गांव में लक्ष्य से भटकी सरकारी योजनायें

मऊरानीपुर (झांसी) खण्ड ब्लाक की सबसे बडी ग्राम पंचायतों में शुमार अक्सेव में विकास हुआ और हो रहा है। लेकिन ग्रामीण हितों की सरकारी योजनायें लक्ष्य के विपरीत चल रही है, पात्रों पर अपात्र हावी है, यही बजह है कि सरकारी इमदाद पात्रों से कोंसों दूर है।

इस मामले में प्रधान का कहना अपनी जगह सही है वहीं यहां के निवासी जो बताते है उससे साफ जाहिर है कि यहां सरकारी योजनायें रास्ते से भटक गई है।

राशन, आवास, शौचालय, बिजली, पानी, पेंशन सब अपने लक्ष्य से भटके मिले, यहां के निवासी बृद्व प्रताप सिंह पुत्र हरदेव सिंह पत्नी श्रीमति गिरकुअंर के साथ कच्चे मकान में रहते है।

एक बीघा जमीन के काश्तकार होने के बाद भी गांव में मजदूरी करते है लेकिन गारंटी नही कि रोज काम मिले, इनका इकलौता पुत्र महानगरों में काम करता है, खण्डहर में तब्दील मकान में रहने वाले प्रताप सिंह बतातें कि उक्त योजनाओं से आज तक उनका आमना सामना नही हुआ यहां तक कि बृद्वावस्था पेंशन भी नही मिलती है, इनके आसपास एक अदद हैण्डपम्प न होने पर दोनों बृद्व प्राणी आधा किलोमीटर दूर से पानी लाने में हांफ जाते है।

यह कहानी सिर्फ प्रताप सिंह की नही है, इनके अलावा सैकडों पात्र आज भी योजनाओं का इंतजार कर रहे है

56 सौ की आबादी वाली अक्सेव ग्राम पंचायत में लगभग 1 हजार परिवार निवास करते है, जिनमें 30 फीसदी ग्रामीण विकसित क्षेत्र में रहते है बाकी के 70 फीसदी ग्रामीण विकासशील वाले क्षेत्र में रहते है।

इनके पीने के पानी के लिये पूरे गांव में मात्र 46 हैण्डपम्प है जिनमें तमाम खराब पडे है, परम्परागत जल स्त्रोत लगभग सूख चुके है, हैण्डपम्पों के पास से निकली नालियांं का पानी वाटर रिचार्ज करने का काम करता है पर पानी तब मिले जब हैण्डपम्प सही हो।

सीमा, रुपादेवी, कौशल्या, सावित्री, उर्मिला सहित ग्रामीण महिलायें बताती है कि राशन के लिये ग्राम मडवा चार किलोमीटर दूर जाना पडता है इसके बाद भी राशन मिल जाये कोई गारंटी नही।

गांव का तालाब गदंगी से भरा पडा है, सफाई के नाम पर गदंगी से बजबजाते नाले बतातें है कि स्वच्छ भारत मिशन आपरेशन अभी बाकी है, इसके पीछे मुख्य कारण सफाई कर्मी की यहां स्थाई तैनाती न होना।

नीमा पत्नी धनीराम ने किसी तरह पुत्री की शादी कर दी, इकलौते दिव्यांग पुत्र को बहिन अपने साथ ले गई जहां उसकी देखभाल करती है।

गांव में नीमा भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है पति की मौत के बाद लघु सींमात कृषक होने के बाद भी मजदूरी करके पेट पालती।

सबसे अधिक रोष ग्रामीणों में लेखपाल के खिलाफ दिखा, कारण तमाम योजनाओं में लेखपाल की जिम्मेदारी होने के बाद भी तैनाती से अब तक गांव न जाना।

मनप्यारे पुत्र, रनमत के अलावा ग्रामीण श्यामलाल, बृजनंदन, ग्यादीन, बालादीन, हरीराम अमरजू, परसु, मुन्ना, राकेश आशाराम मनमोहन, जुगल, कौशल्या, जनसू, उमराव, अखिलेश, मनोज, बिहारी, भगवानदास, दामोदर, गगांबाई, सहित तमाम ग्रामीण हाथ उठाकर लेखपाल तेजसिंह पटेल के खिलाफ आक्रोश जताते हुये आरोप लगाते है कि लघुसीमांत कृषकों के पी. एम. किसान सम्मान के दो हजार रुपये आज तक उनके खाते में नही आये, बैकों के चक्कर काटकर बैठ गये कारण बताया कि मिला कुछ नही और एडवांस डिमांड पहले सक्रिय दलाल तय करते है।

बद से बदतर हालत में है सहारिया परिवार

सर्वण पिछडों के क्षेत्र से अलग गांव से लगे सहारिया मजरे की दशा बद से बदतर है, यहां के निवासी नाली के कीडे मकोडों से बदतर जिदंगी बिता रहे है, राशन, आवास, शौचालय, बिजली, पानी, पेंशन जैसी मूलभूत सुविधायें कैसी होती कैसे मिलती है इन्हैं नही मालूम, इनके नाम पर कब काम,किसका विकास हो गया यह भी इन्हैं नही पता,

लगभग 70 परिवारों के सहारिया मजरे में कुल दो हैण्डपम्प है जिनमें एक काम कर रहा दूसरा जुगाड से चलाया जा रहा है, इनके निवास क्षेत्र के खम्बे पर 11 हजार की डी.पी लगाकर तार खुले छोड दिये कहीं हादसा न हो जाये इसी फिक्र में रहते है।

ज्यादातर कच्चे मकान वाले भूमिहीन सहारिया में मनोहर पुत्र जालिम सहारिया बताता है कि उसको दो पुत्र तीन पुत्रियां है किसी तरह पहली बेटी का सम्बंध तय हो गया दो दिन बाद शादी है।

लेकिन आर्थिक तंगी के चलते शादी अनुदान योजना इसके लिये लफ्फाज साबित हुई, मनोहर बताता है कि प्रधान झानसिंह ने शादी में सहायता के लिये हाथ बढाये है।

इनके अलावा काशीबाई, राजेश, चिंटू, कलिया, चउदे, गनेश, विश्वनाथ, रामसिंह, लक्ष्मण, छत्रपाल, जसपाल, कम्मोद, कालीचरण, सुरेन्द्र, हरपाल, जयपाल, शंकर, नंदराम, सुल्लन, तुलाराम, दीपू, ईश्वर, ओमप्रकाश, शीलू, परसुराम देशराज सहित तमाम सहारियां परिवार आज भी गुलामी की जिंदगी जी रहे है, मकान के नाम पर कच्चे कमरां में  गुजर बसर करते है।

बृद्व से युवा तक ताश के पत्तों में समय बिताते है मजदूरी मिलना इन सबके लिये वरदान से कम नही, योजनायें दूर की बात है,

इस मामले में ग्राम प्रधान झान सिंह का कहना है कि पूर्व में किस प्रतिनिधी ने क्या किया उससे कोई मतलब नही लेकिन उन्हौंने गांव का आर्दश गांव बनाने का सकंल्प लिया है, ग्राम निधी सहित अन्य निधियों से काम जारी है, प्रधान स्वीकार करते हैं कि अभी वह अपने लक्ष्य से दूर है लेकिन बराबर विकास की राह पर चल रहे है, योजनाओं के बारे में बताया कि जिन्हैं योजनाआें का लाभ दिलाया गया वह पैसे हडप कर महानगर चले गये या भूमिगत हो गये बिना सहयोग के विकास नही होता।

रिपोर्ट- रवि अग्रवाल रठा

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