नरक से भी बदतर जिंदगी गुजार रहे बुंदेलखंड के इस गांव के लोग

विकास से कोसो दूर है जनपद जालौन का ये गांव 

जनपद जालौन के खण्ड विकास कार्यालय नदीगांव के अंतर्गत पहुज नदी के किनारे बसे ग्राम ढीमरपुरा में रहने वाले एक ही जाति के करीब 250 ग्रामीणों को शासन प्रशासन की उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीण नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। प्रदेश की योगी सरकार भले ही गांव में विकास के लाख दावे करें, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। केंद्र सरकार की महत्त्वकांक्षी योजना में शामिल स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव में एक भी शौचालय का निर्माण न होना शासन प्रशासन की कार्य प्रणाली पर एक तमाचा हैं।

जनपद जालौन के नदीगांव ब्लॉक अंतर्गत ढिमरापुरा है। जहां लगभग एक ही जाति के 250 के ऊपर की आबादी वाले इस ढिमरापुरा गांव में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। नाली, खड़ंजा, सड़क, आवास, शौचालय, राशन, पेंशन से ग्रामीण वंचित हैं। लोग टूटे उजड़े आशियाने में रहने को विवश हैं। जहां लोग बरसों से पक्की सड़क को अपने गांव की ओर देखने के लिए मोहताज हैं, और जिम्मेदार लोग सड़क निर्माण को लेकर किसी भी प्रकार की सुध नहीं ले रहे हैं।

विकास के लाखों दावे किए जाएं। मगर आज भी ढिमरापुर जिले का एक एक गांव ऐसा जिसे विकास की दरकार है। भले ही पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ गया है। मंगर गांव के लोग आज भी टूटी फूटी पगडंडी धूल भरी रास्ते, बरसात में कीचड़ से सने रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं.

स्वच्छ भारत अभियान क्या है? जैसे ग्रामीणों को इस बारे में पता ही नहीं. ग्रामीण आज भी सरकारी योजनाओं से बनने वाले शौचालय के बारे में अनभिज्ञ हैं। नदी गांव क्षेत्र के पंचायत अंतर्गत

ढिमरापुरा के ग्रामीणों की विडंबना यह है कि ना तो चलने के लिए गांव में सड़क है, और ना ही नदी पार करने के लिए एक अदद पुल। प्रत्येक दिन इस गांव से सैकड़ों ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं। नदी में पानी बहने पर लोग कई दिनों तक गांव से दूर बाहर नहीं जा पाते।

जब से इस गांव का निर्माण हुआ। तब से इस गांव के ग्रामीणों की दशा विकास के अभाव में नहीं सुधरी है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को काफी दिक्कतें होती हैं। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। प्राथमिक पाठशाला का भवन जर्जर है। सड़क न होने पर बर्ष के मौसम में ग्रामीण गांव में ही कैद हो कर रह जाते है। गांव में चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर किसी प्रकार की कोई सुविधा नही है।

इस गांव की ओर न ही किसी राजनेता की नजर है, और ना ही प्रशासन की ओर से ध्यान दिया जा रहा है। गांव का विद्यालय भी जीर्ण शीर्ण अवस्था मे है। विद्यालय में दो अध्यापक कार्यरत है। जिनमे एक मैडम है, जिनकी शक्ल आज तक न ही किसी बच्चे ने और न ही किसी गाँव वालों ने देखी है। गांव में रहने वाले मोतीलाल, बद्री, रमेश, कलु ने बताया कि ग्रामीणों को पेंशन से लेकर शासन की किसी भी प्रकार की कोई योजना का लाभ प्राप्त नही हो रहा हैं।

रिपोर्ट :- दुर्गेश कुशवाहा

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