अनुराग शर्मा का समर्थन करने वाले सरकारी अध्यापकों से क्यों खफ़ा हैं श्याम सुंदर

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झांसी। लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण में भले ही बुंदेलखंड की चर्चित शीट झांसी ललितपुर में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई हो, लेकिन प्रत्याशियों में अभी भी कहीं न कहीं टीस बाकी है। मतदान हो जाने के बाद भी कई पुरानी बातें अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी मतदान कार्मिकों द्वारा जबरन महिला से अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट डलवाने की बात हो या फिर रिजेक्टेड ईवीएम मशीन को बिना सुरक्षा के देर सवेर स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने की बात। मामले जो भी हो, लेकिन मतदान हो जाने के बाद अब भी कई मामले सुर्खियां बटोर रहे हैं। इनमें से एक मामला है सरकारी मास्टरों का।
यह मामला उन सरकारी मास्टर है। जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी अनुराग शर्मा के समर्थन में एक मीटिंग में शामिल होकर भाजपा को हर हाल में जिताने की हुंकार भरी थी, और अब कहा जा रहा है कि ऐसे ही सरकारी मास्टरो पर अब गठबंधन के प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह यादव की टेढ़ी नजर हो गई है। ऐसे में सरकारी मास्टर भी अपने आप को फंसा नजर पा रहे हैं।

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क्या है पूरा मामला ?

यह पूरा मामला मतदान के पहले यानी 29 अप्रैल के पहले का है। गठबंधन के प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह यादव ने जिला निर्वाचन अधिकारी यानी जिला अधिकारी से शिकायत करते हुए कहा था कि, नगर की एक होटल में कुछ सरकारी अध्यापकों के साथ एक मीटिंग की गई। यह मीटिंग भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग शर्मा के समर्थन में आयोजित की गई थी। इस मीटिंग में ना सिर्फ सरकारी अध्यापक बल्कि कुछ भाजपाई नेता भी शामिल थे। खास बात यह है कि इन्हीं सरकारी अध्यापक चुनाव में बतौर बीएलओ और पीठासीन अधिकारी नियुक्त किए गए थे। सरकारी अध्यापकों की राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति के समर्थन वाली मीटिंग में नहीं जाना चाहिए था, और यह नियम के खिलाफ है।

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झांसी डीएम में लिया एक्शन

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह यादव की शिकायत के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी यानी जिलाधिकारी झांसी ने उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच कराने की निर्देश दिए। इस जांच टीम में जिला विद्यालय निरीक्षक झांसी और बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी समेत अपर जिलाधिकारी को शामिल किया गया। जांच के दौरान जिस होटल में यह मीटिंग की गई थी। उसकी 4 घंटे सीसीटीवी फुटेज भी निकलवाई गई, लेकिन यह जांच अपने अंजाम तक पहुंचती उसके पहले एक बार फिर गठबंधन के प्रत्याशी ने अड़ंगा लगा दिया।

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फिर क्या हुआ?

जांच के दौरान ही गठबंधन के प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह यादव ने जांच कर रहे अधिकारियों पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं से मिले होने का शक जाहिर किया। इसके पहले की जांच किसी और के हाथों में जाती। एक प्रमुख जांच अधिकारी ने अपना हाथ इस जांच टीम से स्वम हटा लिया और एक बार फिर नए अधिकारी के हाथों में यह जांच आ पहुंची है।

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सरकारी मास्टरों को बचाने में जुटे भाजपा के दिग्गज ?

इस पूरे मामले के दौरान एक खबर और उड़ते उड़ते हाथ लगी है। कहा जा रहा है कि जिन सरकारी अध्यापकों पर गठबंधन प्रत्याशी की टेढ़ी नजर हो गई है, और वह हर हाल में इन अध्यापकों पर कार्यवाही चाहते हैं। वहीं कुछ भाजपाई इन अध्यापकों को बचाने में भी पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह खबर बे सिर पैर वाली साबित हो रही है। इसमें कितनी सच्चाई है? यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता।

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फंस सकते हैं कई अध्यापक

इस पूरे मामले में एक बात तो तय है कि यदि कोई सरकारी अध्यापक ऐसी किसी भी मीटिंग में शामिल हुआ है तो उस पर कार्यवाही होना तय है। और यदि उन अध्यापकों की पहचान कर यह भी पता कर लिया जाता है कि उनकी ड्यूटी संबंधित चुनाव में भी लगी थी। तब बड़ी कार्यवाही भी हो सकती है। इससे भी एतराज नहीं किया जा सकता।
लेकिन यदि सरकारी अध्यापकों का समूह इस मामले में एकजुट होता है तो इससे भविष्य में झांसी और आसपास के क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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