खंडहर में तब्दील गुरसराय का किला, रोचक है किले का इतिहास

 गुरसराय झांसी. गुरसराय का प्राचीन किला महाराजा अधिकार क्षेत्र में था. शासकों के द्वारा ऐतिहासिक किले के नीचे बहुत ही सुंदर तालाब का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब इस तालाब को जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की दरकार है. हालांकि कुछ समय पूर्व नगर वासियों ने जनसहयोग से इस तालाब की दशा सुधारने का प्रयास किया था. जिससे तालाब का अस्तित्व समाप्त होने से बच गया, लेकिन उसकी पुरानी आन बान शान वापस नहीं लौट सकी. गुरसराय का ऐतिहासिक तालाब का प्राचीन किला हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है. इतिहास के पन्ने पलटे तो पता चलता है एक समय था जब इस किले पर लगभग कई वर्षों पहले मराठा शासक राज किया करते थे. गुरसराय रियासत का संचालन जालौन से होता था.

गुरसराय के किला का इतिहास

गुरसराय का किला
गुरसराय का किला

सन 1727 ईस्वी  में  गुरसराय रियासत का प्रथम शासक दिनकर राव खेर को बनाया था. दिनकर राव खैर को लोग सम्मान के साथ आबाजी सरकार भी बोलते थे. आबाजी बहुत ही धर्म प्रिय और न्याय प्रिय राजा थे. उनकी धर्म में गहरी आस्था थी. उन्होंने उस किले के नीचे एक खूबसूरत तालाब का निर्माण कराया था. साथ ही तालाब के पूर्वी भाग में सीढ़ीयों के ऊपर दिनकर राव खेर ने श्रीराम दरबार एवं भगवान शिव के भव्य मंदिरो का निर्माण एक साथ ही चारदीवारी के भीतर करवाया. यह किले के परकोटे प्रवेश द्वार के ठीक सामने आज भी स्थापित है. इस प्रकार प्रथम शाशक श्रीमंत दिनकर राव खेर (आबाजी) द्वारा मंदिर आज भी स्थापित है.

अंतिम शासक , जिसके लिए ट्रेन में लगती थी अलग से बोगी

gursarai ka kila

गुरसराय राजघराने के अंतिम शाशक लक्ष्मण सीताराम खेर थे. जो अंग्रेजी हुकूमत में भी दो प्रान्तों सीपीआर यूपी के इनकम टैक्स कमिशनर थे. पहले मध्य प्रदेश को सीपी और उत्तर प्रदेश को यू पी कहते थे. श्रीमंत खेर को आजादी के बाद सभी नगरवासी सरकार कह  कर संबोधित करते थे. अंग्रेजी शासन में रेलगाड़ी में उनके लिए अलग से एक बोगी लगती थी.

छत्रसाल से जुडी है गुरसराय के किले की कहानी

लोगों का कहना है कि जन सहयोग से इस तालाब का बिना सरकारी धनखर्च किये गहरीकरण कार्य कराया गया, और प्राचीन घाट निकलवाए गए बताया गया है कि सरदार बाजीराव पेशवा द्वारा छत्रसाल ने अपने राज्य का एक तिहाई हिस्सा बाजीराव पेशवा को दिया था. जिसमें झांसी ग्वालियर और जालौन था. बाद में छात्रसाल द्वारा सागर मध्य प्रदेश रियासत पेशवा को दे दी थी. महाराजा छत्रसाल कुशल शासक और वीर योद्धा भी थे. उनके पिता का नाम चंपत राय था. छत्रसाल द्वारा अपने जेष्ठ पुत्र हृदय शाह को पन्ना रियासत का उत्तराधिकारी बनाया. जब के छोटे पुत्र जगत राज को जैतपुर बेलाताल की रियासत पर आसीन किया छत्रसाल द्वारा प्रदत एक तिहाई हिस्सा रात होने के बाद बाजीराव पेशवा को झांसी रियासत की निंबालकर (नेबालकर) को बैठाया गया, और ग्वालियर की गद्दी पर रानी जी शिंदे को भी आसीन किया गया.

किले का तालाब बना बरदान

gursarai ka kila

इसी प्रकार  नेवलकर आमी मराठा को जालौन की गद्दी दी थी, ने बूढ़े पुराने लोगो द्वारा बताया गया कि यह मंदिर गुरसराय नगर का प्राचीन मंदिर है. जो कई बर्षो पहले गुरसराय नगर के राजा द्वारा बनाया गया था, और इस मंदिर के ठीक पीछे एक प्राचीन तालाब भी है. जो गुरसराय किले के राजा द्वारा खुदबाया गया था. जिससे गुरसराय नगर की जनता को कभी पानी की किल्लत न हो. यह तालाब आज मंदिर की छटा को अलग तरीके से बिखेरता हुआ नजर आता है, और यह तालाब गर्मी के मौसम में गुरसराय बासियों के लिए बरदान साबित हो रहा है. क्योंकि गुरसराय नगर का यह एकमात्र तालाब है. जो नलो के जलस्तर को बनाये रखे है. इस तालाब से गुरसराय सहित आधी आबादी प्यास बुझाती है. आज यह तालाब गर्मी के मौसम में लोगो के लिए बरदान साबित हो रहा है.

अब ऐसे ऐसे काम होते है किले के अंदर

बही इस तालाब माता मंदिर के पीछे एक प्राचीन किला है. जो आज भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है. लोगो द्वारा बताया गया है कि इस किले पर कई राजाओ ने राज किया, लेकिन इस किले का पुरातत्व विभाग द्वारा रखरखाव नही किये जाने से यह प्राचीन किला खंडहर में तब्दील हो गया है. और यहां पर कई ऐसे गंदे कृत्य होते रहते हैं जो बताने के काबिल नही. लोगो ने कहा कि अगर यह किला बनकर तैयार हो गया तो यह किला एक प्राचीन किले के रूप में आने बाली पीढ़ियों पर अपनी छटा विखेरता हुआ नजर आएगा, और गुरसराय क्षेत्र की शान माना जाएगा. और बही पास ही में बने तालाब में सुन्दरीकरण नही होने से इस तालाब में कई लोगो की जान चली गयी. लोगो ने कहा अगर तालाब पर सुन्दरीकरण हो गया तो इससे लोगो की जान जाने से बचेगी,

सुलगते सवाल

gursarai fort

लोगो ने बताया कि कई बार नगर पालिका में ज्ञापनों के माध्यम से तालाब सुन्दरीकरण की मांग रखी लेकिन किसी भी प्रतिनिधि किसी भी पार्टी के नेता ने लोगो की समस्या पर ध्यान नही दिया लेकिन प्रशन यह उठता है कि क्या प्राचीन किले के नाम पर खंडहर में तब्दील इस मंदिर के किले पर क्या ऐसे ही गंदे कृत्य होते रहेंगे क्या सरकार पैसा बचाने के नाम पर सौन्दरीकरण नही करायेगी क्या ऐसे ही लोगो की जाने जाती रहेंगी क्या हर सरकार बादो के नाम पर ऐसे ही जुमलेबाजी करती रहेगी आखिर कब तक क्या इस प्राचीन किले और प्राचीन तालाब का सुन्दरीकरण हो पायेगा क्या इस लोकसभा चुनाव के बाद गुरसराय नगर की यह आस प्यूरी हो पाएगी या फिर ऐसे ही सरकारे बदलती रहेंगी और ऐसे ही गुरसराय का किला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाता रहेगा

रिपोर्ट : अजय वर्मा

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