गरौठा जालौन भोगनीपुर लोकसभा के प्रत्याशियों को नहीं चाहिए इन गांव के लोगों के वोट ?

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बुन्देलखण्ड के इन लोगों से किसी को वोट नहीं चाहिए???
नेता जी के दर्शन 5 साल में एक बार होते हैं, वह भी तब जब वोट पढ़ने का टाइम आता है, लेकिन अबकी बार शायद नेताजी ज्यादा ही कुछ व्यस्त है। उन्हें जनता से वोट मांगने तक का भी समय नहीं है, और ना ही उन तक पहुंचने का समय है। क्योंकि लोकसभा क्षेत्र बहुत बढ़ा है। ऐसे में जो जनता उनके लिए वोट कर रही है। वह उनके सुख-दुख कैसे समझ सकते हैं? कैसे उनकी समस्याएं जान सकते हैं? और कैसे उनका निराकरण कर सकते हैं? यह कहानी है उत्तर प्रदेश की गरौठा जालौन भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों की।

बैठकर यह लगाया जाता है गुणा-भाग

गरौठा जालौन भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र में एक गांव है “नगरा” । यहां आज तक कोई वोट मांगने नहीं आया है। क्योंकि गांव छोटा है। सिर्फ हजार 12 सौ वोटर ही हैं। भाजपाई कहते हैं ब्राह्मणों का गांव है, वहां जाना समय खराब करना है, वोट हमें ही मिलेंगे, सपाई कहते हैं यहां से हम कभी नहीं जीते, सो कोई फायदा नहीं यहां जाने का, बसपा कहते हैं, सभी लोग तो दिल्ली बम्बई हैं मजदूरी कर रए, वोट कीसे मांगे?? कांग्रेस तो इस बार सरकार बनाने के फुल कॉन्फिडेंस में है, बैसे भी कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व बसपाई हैं, सो उन्हें इस गांव में वोट मांगने की जरूरत ही नहीं।

इसीलिए यहां न तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशी अजय सिंह पंकज और न ही बहुजन समाज पार्टी से कूदकर कांग्रेस में आए और कांग्रेस के टिकट पर इस क्षेत्र से सांसद पद की दावेदारी जता रहे प्रत्याशी बृजलाल खाबरी और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी भानु प्रताप वर्मा के तो कहना ही क्या? वह गरौठा जालौन भोगनीपुर क्षेत्र से कई बार सांसद रह चुके हैं, लेकिन आज तक उन्होंने शायद इस गांव का नाम नहीं सुना, कि यह गांव भी उनके ही लोकसभा क्षेत्र में हैं।

इस गांव के लोग बहुत समझदार हैं। वह जानते हैं कि लोकसभा क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों गांव भरे पड़े हैं। नेताजी कहां कहां जाएं ?? लेकिन यहां करीब डेढ़ दशक तक सांसद रहे भानु प्रताप वर्मा ने आज तक यह गांव नहीं देखा और वह न ही वोट मांगने आए

नेताओं को डर है यहाँ आने से?

सांसद जी को शायद डर है कि इस गांव के लोग कहीं उनसे 15 साल से इस गांव में एक बार भी ना आ पाने का सवाल न पूछ लें। कहीं गांव की औरतें सांसद जी से यह न पूछ ले कि उन्होंने क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध क्यों नहीं कराया जिसकी वजह से उनके पति और बच्चे तक दिल्ली और मुंबई रहकर मजदूरी कर रहे हैं, जो साल में एक या दो बार ही आ पाते हैं। कहीं गांव की बेटियां उनसे यह न पूछ ले कि 15 साल में आज तक इस गांव की बेटियों को इसी गांव में पढ़ने के लिए कोई विद्यालय क्यों नहीं खोला गया जिससे वह है इसी गांव में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। तमाम सवाल है सांसद जी के लिए शायद यही वजह है कि वह अब तक इस गांव में नहीं आया।

ऐसा नहीं कि यह सवाल केवल भाजपा प्रत्याशी के लिए हो बल्कि अन्य पार्टी के प्रत्याशियों के लिए भी ग्रामीणों ने कई सवाल सोच कर रखे हैं। लेकिन समस्या तो यह है कि इन में एक प्रत्याशी का नाम तो इस गांव के लोगों ने सुना ही नहीं, तो इनसे सवाल करने न करने का सवाल ही नहीं होता। इन प्रत्याशियों को शायद डर है ग्रामीणों के सवालों के जिसकी वजह से हुआ है गांव में नहीं आना चाहते।

ये गांव तो उदाहरण मात्र, और भी कई गांव, जहाँ नहीं जाना चाहते नेता जी

यह गांव तो केवल एक उदाहरण मात्र है, बल्कि लोकसभा क्षेत्र और बुंदेलखंड में ऐसे तमाम गांव हैं, जहां देश का प्रधानमंत्री चुनने का अधिकार मांगने वाला व्यक्ति गांव के गरीबों के पास नहीं जा रहा है, और उम्मीद रखता है कि वह उन्हें वोट करे। इनका बहाना रहता है कि लोकसभा क्षेत्र काफी बड़ा है। जबकि सच तो यह है कि यहां कई सालों से बुंदेलखंड में राज करती चली आ रही तमाम राजनीतिक पार्टियों ने यहां के लोगों के लिए कुछ नहीं किया? अब तक लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हुई है। विकास कोसों दूर है।
नेता जी को जब वोट मांगने तक का टाइम नहीं, तो समस्या का निराकरण करने और विकास जिसके नाम पर वोट मांगे जाते हैं उसका टाइम कैसे निकलेंगे?

यदि नेता जी आपके यहाँ भी नहीं पहुँचे तो पोस्ट को अपनी तरफ से आगे बढ़ाएं

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