अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) Biography | Baidyanath Jhansi | BJP Candidate

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अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) : वैसे तो बुंदेलखंड किसानों की भुखमरी और त्रासदी के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी बुंदेलखंड में कुछ ऐसे लोग भी पैदा हुए हैं। जो पूरे देश में ही नहीं विश्व में भी पहचाने जाते हैं। ऐसे ही लोगों की फेहरिस्त में एक और नाम शामिल है। जिसे हम अनुराग शर्मा के नाम से जानते हैं। अनुराग को देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जाना जाता है। आइए जानते हैं, अनुराग के बारे में।

वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की कर्मभूमि से पहचानी जाने वाली बुंदेलखंड की झांसी सिटी में जन्मे पंडित अनुराग शर्मा बैद्यनाथ ग्रुप से ताल्लुक रखते हैं। आयुर्वेद में उन्हें विश्वस्तरीय ज्ञान है, और वह इसके विश्व स्तरीय वक्ता भी है। इसके अलावा और भी बहुत ही बातें हैं, जिनसे अनुराग शर्मा खुद को सबसे अनोखा बनाते हैं।

अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) उद्योगपति होने पर भी की नौकरी

भारत के टॉप 100 उद्योगपतियों में शामिल अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) वैद्यनाथ ग्रुप के चेयरमैन हैं। उन्होंने 1986 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, और फिर इसके बाद शक्ति प्रेस नागपुर में अपनी पहली नौकरी की। फिर वह बैद्यनाथ के सीईओ बने। 16 नवंबर 1964 को झांसी में जन्मे अनुराग स्वर्गीय बैद्यनाथ पंडित रामनारायण शर्मा के पोते हैं।

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इनके दादा जी ने सन 1919 में बैद्यनाथ को शुरू किया था। जिसके बाद यह कंपनी भारत की नंबर वन आयुर्वेद औषधियों की कंपनी बनी और आज तक यह नंबर वन ही है। हर साल है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से इन्हें पुरस्कृत भी किया जाता है। अनुराग ने अपनी कंपनी को विभिन्न आधुनिक उत्पादन तकनीक और नवीन रचनात्मक व्यापार की नीतियों के द्वारा बुलंदियों पर पहुंचाया। उन्होंने व्यस्त मार्ग निर्देशन में कंपनी की बहुत ही ज्यादा प्रगति की, और इसे पूरे देश में एक ब्रांड की तरह स्थापित किया। अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) ने आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के लिए विभिन्न देशों का भ्रमण किया। इस दौरान वह फ्रांस, स्पेन, हॉलेण्ड, यूएसए इंग्लैंड आदि भी गए और वहां भी आयुर्वेद का लोहा मनवाया।

अनुराग पैकेजिंग परिवहन रियल स्टेट और वित्तीय सेवाओं जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी अपने बिजनेस स्थापित किए हुए हैं। यह भारत में डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग के विशेषज्ञ भी है।

अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) की शिक्षा

2000-2002 हारवर्ड विजनेस स्कूल से कम्पनी मालिकों के हेतु ‘अध्यक्ष प्रबन्धन कार्यक्रम‘ पर
आधारित कोर्स।
1987-1988 बुन्देलखण्ड यूनिवर्सिटी से वाणिज्य में परास्नातक।
1983-1986 हिसलाप कालेज (नागपुर) से वाणिज्य में स्नातक।

बुंदेलखंड में धाक थी पिता विश्वनाथ शर्मा की

अनुराग के पिता पंडित विश्वनाथ शर्मा निर्विरोध जिला परिषद झांसी के अध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा 1980 से 1984 तक वह झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद ही रहे हैं। इसके बाद 1991 से 1996 तक हमीरपुर महोबा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डी-लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। अनुराग शर्मा पिताजी और दादा जी की तरह सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षिक एवं खेल संस्थाओं से भी जोड़कर बुंदेलखंड में काफी योगदान दिया है। बुंदेलखंड के जाने-माने स्कूलों में गिना जाने वाला रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल के चेयरमैन भी हैं। इसके अलावा बुंदेलखंड एकीकरण समिति के चेयरमैन भी है।

इनके परिवार ने शुरू से ही बुंदेलखंड प्रांत निर्माण की सिफारिश की है, और इसके लिए लगातार काम भी किया जाता रहा है। जो आज भी चल रहा है। बुंदेलखंड प्रांत निर्माण के तहत बुंदेलखंड एकीकरण समिति की स्थापना की गई। जिसमें 14 सौ से ज्यादा नगर व गांव प्रभारी है। जबकि 62000 से भी ज्यादा सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं।

इनके पिता पंडित विश्वनाथ शर्मा ने अपने संसदीय कार्य काल में हॉकी के जादूगर पदम भूषण मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को खेल दिवस के रूप में घोषित कराया था।

बुंदेलखंड के लिए क्या किया अनुराग शर्मा (Anurag Sharma) और उनके परिवार ने ?

अनुराग शर्मा और उनके परिवार ने लगातार बुंदेलखंड के विकास के लिए काम किया है। जो लोग कहते हैं कि अनुराग उद्योगपति हैं। उनके लिए यह बात बड़े ही गौर करने वाली है कि अनुराग के पिता बुंदेलखंड की दो अलग-अलग लोकसभा सीटों से चुनाव लड़े और जीते हैं।लोग यह भी जानते होंगे कि एक लोकसभा सीट में करीब 5 विधानसभा शामिल होती हैं, और ऐसे में बुंदेलखंड की 2 लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ कर जीतना मतलब 10 विधानसभा क्षेत्रों में अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है। और यह पकड़ तभी संभव है जब वहां के लोगों के दिलों में इनके लिए जगह हो।

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अनुराग और उनके पिताजी लगातार बुंदेलखंड की बच्चों की शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य के लिए आगे आए हैं।इसके अलावा उन्होंने खेल को भी बढ़ावा दिया है। तो वही कुटीर उद्योग के जरिए वहां के लोगों को काम दिलाने में भी मदद की है। बुंदेलखंड में संचालित गैर सरकारी स्कूलों में लगातार बुंदेलखंड एकीकरण समिति द्वारा कॉपी किताबें स्टेशनरी के सामान बच्चों को वितरित किए जाते हैं। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी कैंप लगाकर निशुल्क दवाइयां वितरित की जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ खेलकूद से जुड़े आयोजन भी अलग-अलग क्षेत्रों में किए जाते हैं।

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