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खुलासा : सपा सरकार में रेवड़ियों की तरह बटा यश भारती सम्मान, जानें सवाल उठे तो क्या बोले अखिलेश

खुलासा : सपा सरकार में रेवड़ियों की तरह बटा यश भारती सम्मान, जानें सवाल उठे तो क्या बोले अखिलेश

लखनऊ।​ उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार में रेवड़ियों की तरह यश भारती सम्मान बांटा गया ।समाजवादी सरकार की 5 सालों में करीब 200 लोगों को इससे नवाजा गया है। इसमें जमकर भाई-भतीजावाद हुआ है। वही मंत्रियों और मुख्यमंत्री समेत अफसरों की सिफारिश पर यह अफसरों के परिजनों, दोस्तों और समाजवादी पार्टी के खासमखास लोगों को दिया गया है। जिसके बाद अब सवाल खड़े होने लगे हैं, इस पर खड़े होते ही अखिलेश यादव ने कहा कि अब तो केंद्र और राज्य में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। वह भी रेवड़ियों की तरह इसे बांट दे। यही नहीं अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि पेंशन भी 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख कर देनी चाहिए ।अखिलेश यादव के इस गैर जिम्मेदाराना बयान से एक बार फिर सियासी सरगर्मियां बढ़ गई है।

तो शुरू हुआ यश भारती सम्मान

आपको बता दें कि 1994 में समाजवादी सरकार ने ही यश भारती सम्मान को शुरू किया था। मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए यश भारती सम्मान शुरू तो हुआ लेकिन जैसे ही सूबे में बहुजन समाज पार्टी और बीजेपी की सरकार आई तो यह बंद हो गया। एक बार फिर 2012 में जब समाजवादी सरकार लौटकर आई तो इसे फिर से शुरू किया गया और करीब 200 लोगों को रेवड़ियों की तरह इसे बांट दिया गया।

ये रकम और सुबिधायें भी मिलती हैं

ज्ञातव्य हो की यश भारती सम्मान के तहत सम्मानित व्यक्ति को एक मुस्त 11 लाख रुपए दिए जाते हैं । जबकि हर महीने पेंशन के तौर पर ₹50 हजार भी दिए जाते हैं । अखिलेश सरकार में दिए गए यश भारती सम्मान का खुलासा इंडियन एक्सप्रेस द्वारा मांगी गई आरटीआई द्वारा किया गया है। 

इन्हें किया गया सम्मानित

समाजवादी पार्टी की पत्रिका समाजवादी बुलेटिन के कार्यकारी संपादक अशोक निगम,  समाजवादी पार्टी के सांस्कृतिक सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव,  दिवंगत एसपी नेता मुरलीधर मिश्रा के बेटे मणिन्द्र कुमार मिश्रा सहित कई नाम हैं जिन्हें यश भारती नवाजा गया है. इनमें दिवंगत कांग्रेसी नेता जगदीश मतानहेलिया की बेटी शिवानी मतानहेलिया भी शामिल थी.

20 वर्षीय को भी यश भारती सम्मान

यश भारती पाने वाली 20 वर्षीय स्थावी अस्थाना सबसे युवा अवॉर्डी हैं. बता दें कि अस्थाना के पिता हिमांशु कुमार आईएएस रैंक के अफसर हैं और उस वक्त यूपी सरकार के प्रधान सचिव थे.  स्थावी को जब अवॉर्ड मिला वह एनएलयू दिल्ली में कानून की पढ़ाई कर रही थी.  उसे  घुड़सवारी के लिए खेल के लिए यश भारती दिया गया.

यूपी के मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन की पत्नी सुरभि रंजन को भी यश भारती पुरस्कार दिया गया. अखिलेश के कार्यकाल में  सीएम के ओएसडी रहे रतीश चंद्र अग्रवाल ने खुद ही अपने नाम की सिफारिश की थी. इसके अलावा सैफई महोत्सव कार्यक्रम का संचालन करने वाली अर्जना सतीश के नाम की अनुशंसा लखनऊ के तत्कालीन एडीएम जय शंकर दुबे ने की थी.