Check the settingsपूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि, कोई हुआ मौन और किसी ने यूं बयां किया 'दर्द' — Action News India
Breaking News
पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि, कोई हुआ मौन और किसी ने यूं बयां किया ‘दर्द’

पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि, कोई हुआ मौन और किसी ने यूं बयां किया ‘दर्द’

कटेरा (झाँसी)

कस्बे के मैन बाजार में देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान व बाजार बंद कर शोक सभा आयोजित कर अटल बिहारी बाजपेयी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धाजली दी। इस दौरान आयोजित श्रद्धाजली शोक सभा में वक्ताओँ ने उन्हें अपनी-अपनी तरह से याद किया।

किसी ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी, तो किसी ने भावुक होकर अपने मन की बात कहकर।
तो किसी ने मौन श्रद्धांजलि दी।

शोक सभा में पूर्व चेयरमैन राजेन्द्र सिंह बुन्देला ने कहा कि देश की राजनीति में एकमात्र एक ऐसे नेता थे, जिनका किसी भी स्तर पर उनकी नीति को लेकर कोई विरोधी नहीं था। वह सभी राजनीतिक पार्टियों के चहेते थे।
उनकी विदेश नीति इतनी मजबूत थी कि उनके कार्यकाल में पड़ोसी देशों से संबंध मधुर हुए, वो एक अच्छे नेता होने के साथ वो एक अच्छे कविता कार भी थे।

हरचरन विश्कर्मा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर राष्ट्रवादी राजनीति के लिए अपूर्णीय क्षति है।

कस्बे के व्यापारी जवाहरलाल नीखरा ने कहा कि उनका जीवन देश की सेवा पर ही केंद्रित था। इस दौरान दो मिनट का मौन रख कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

विद्या मन्दिर के प्रधानाचार्य जगदीश सिंह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने जीवन का एक-एक पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया। सच मायने में वे भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे।
सन्तोष अहिरवार ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने नेतृत्व और संघर्ष से जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को मजबूती प्रदान की। उन्होंने जीवन का प्रत्येक पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। वाजपेयी जी जीवन भर लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े रहे। राष्ट्र के प्रति वाजपेयी की सेवाओ को लंबे समय तक याद किया जाएगा।


डॉ लाखन सिंह ने कहा कि अटलजी ने अपने तप और अथक परिश्रम से भाजपा को भारतीय सियासत का एक वटवृक्ष बनाया। अपने अनुपम व्यवहार से अटलजी ने भारतीय राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी। वे अकेले ऐसे नेता थे जिनको दूसरे दलों के लोगों ने भी हृदय से सम्मान दिया। सच मायने में अटलजी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे।

इस मौके पर राजेन्द्र सिंह बुन्देला, रामभरोसे सोनी, जगदीश सिंह, डॉ लखन सिंह यादव, विजय सिंह चन्देल, रामदास राजपूत, राजेन्द्र जैन, हरचरन विश्कर्मा, भगीरथ पुरुहित, पुष्पेन्द्र जैन, सन्तोष अहिरवार, महेश कटेरिया, जवाहरलाल नीखरा, सन्तोष बरसैया, मोहनलाल आर्या, राजकुमार जैन, मनीष सोनी, अंकित जैन, संजीव डेंगरे, जग्गी नीखरा, इमरान खान, संतोष जैन, सुधीर जैन, सुरेश डेंगरे, ओमप्रकाश रावत, प्रेमनारायण फौजी, महेश जैन, अवध नीखरा, सरजू मास्टर, रामकृपाल बुन्देला, सन्देश गुप्ता, प्रमेश गुप्ता, महेश जैन, हरी गुप्ता, डालचंद्र जैन, अनिल रावत, विक्रम बुन्देला, विक्की राजा, नीलू गुप्ता, आच्छेलाल ठेकेदार, शिवशंकर सोनी, मनोज बरसैया, राहुल डेंगरे, अशीष गुप्ता, अर्पित गुप्ता, नीरज जैन, सौरभ जैन, संतू नीखरा परवेज खान, हरिश्चंद्र आर्य सहित नगर के गड़मान्य लोग उपस्थित थे।

रिपोर्ट- भूपेन्द्र गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*