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केकयी का चरित्र वन्दनीय हैं, निदनीय नही-ब्रम्हचारी जी

केकयी का चरित्र वन्दनीय हैं, निदनीय नही-ब्रम्हचारी जी

मऊरानीपुर (झांसी) केकयी जैसी मां होना निंदनीय नहीं बल्कि वंदनीय है वह चाहती थी कि श्री राम सिर्फ अयोध्या के राजा बनकर ना रह जाए बल्कि तीनो लोक के राजा बने उक्त उग्दार कथावाचक पीठाधीश्वर बाबा रामदेव ब्रम्हचारी ने आज से शांतिनिकेतन धनुष धारी मंदिर में परिवारी पुरा साप्ताहिक श्रीराम कथा में व्यास गद्दी से व्यक्त करते हुए धारा प्रवाह कथा में बताया कि मां संतान की तरक्की एवं सुख के लिए कुछ भी कर सकती है राजा दशरथ से बचन हरवाना राम को वनवास इसलिए भिजवाया क्योंकि गुरु वशिष्ठ ने राम को सिर्फ अयोध्या का राजा बनाने के लिए लगुन शोधी थी। पर देवताओं ने मां सरस्वती को केकयी की बुद्धि में विकार पैदा करने के लिए भेज दिया और केकयी ने राम को 14 साल का वनवास मांगा था।
कैकई चाहती थी श्री राम का राजपाट सिर्फ अयोध्या तक सीमित न रह कर जंगल में जाकर भगवान राम को तीन लोक के स्वामी के रूप में देखें।
कथा में बताया गया यह जानकारी उनको नहीं है जो कभी संत समागम या कथाओं में नहीं गए।
ग्रंथों के अनुसार केकई ने पुत्र के प्रति सभी प्रकार के बलिदान दिए साथ ही सारे कलंक खोलिए इस अवसर पर ओम प्रकाश शर्मा, डॉ गदाधर त्रिपाठी, रमेश चंद्र, जनार्दन मिश्रा, विजय त्रिपाठी, कृष्ण गोपाल हवेली, रोहित दुबे, जय प्रकाश खरे, अभिषेक राय, जानकी प्रसाद निरंजन, राकेश राय, जयप्रकाश अयोध्या, अजय तिवारी, विनय ताम्रकार, राजकुमार ताम्रकार, शिवम दास, डॉ सुशील त्रिपाठी, विमला दीक्षित, मनीषा दुबे, डॉ कृष्णा पांडे सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मालूम हो कि आगामी 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अलावा मल मास के महीने को लेकर नगर में धार्मिक उत्सव शुरू हो गए हैं आज से शांति निकेतन आश्रम पर साप्ताहिक श्री राम कथा शुरू हुई जो 26 जुलाई तक चलेगी 22 जुलाई से 26 जुलाई तक बनाए जाएंगे कथा का समापन भंडारा 27 जुलाई को होगा।

रिपोर्ट- रवि अग्रवाल रठा

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