पिन कोड क्या है ? पिन कोड लिस्ट और इसका रोचक इतिहास

पिन कोड क्या है,और हमें इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? ये क्या और किस काम में आता है। इसका क्या इतिहास है? यह सारी ऐसी बातें हैं, जो हमें जनरल नॉलेज के हिसाब से जानना बहुत जरूरी है। कई जिज्ञासु प्रवृत्ति के के लोग भी ऐसे तमाम सवालों के बारे में जानना चाहते हैं।

तो आइए जानते हैं कि आखिर हमें पिन कोड की आवश्यकता क्यों पड़ी? और इसे क्यों बनाया गया? यदि हमें कहीं के पिन नंबर को ढूंढना है। तो कैसे ढूंढे? और इसे देखकर कैसे पता लगाएं कि यह पिन कोड कहां का है? तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पिन कोड का रहस्य?

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पिन कोड क्या है ?

यह दुनिया कितनी बड़ी है। और इस बड़ी दुनिया में ना जाने कितने देश, राज्य, जिले, और शहर होंगे। यही नहीं इसमें लाखों-करोड़ों गांव भी होंगे। ऐसे में उन सभी को याद करना है बड़ी ही मुश्किल की बात थी। जिस तरह हमारी पहचान के लिए आधार कार्ड या पहचान पत्र होते हैं। मोबाइल नंबर की पहचान के लिए कंट्री कोड होते हैं। गाड़ियों की पहचान के लिए नंबर प्लेट होती है। ऐसे ही हर देश, राज्य, शहर और गांव की पहचान के लिए भी एक कोड होता है। जिसे भारत में पिन कोड कहा जाता है।

और आसान हुआ पत्रों का सही पते पर जाना

पिन कोड को अंग्रेजी में (पोस्टल इंडेक्स नंबर) कहा जाता है। यह 6 अंकों का नंबर होता है, और इस नंबर से राज्य की पहचान की जाती है। एक समय था जब पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी का बहुत अभाव था। लोग एक दूसरे से संपर्क साधने के लिए पत्रों का सहारा लेते थे। ऐसे में पत्र जिसे भेजा जाता था। वह उस तक पहुंच जाए। इसीलिए पिन कोड की व्यवस्था की गई थी। आप दुनिया की किसी भी कोने में बैठे हो। जिस किसी भी पत्र या सामान को आपको जिस व्यक्ति तक भेजना है। केवल उस पिन कोड के जरिए आप उस स्थान तक उस व्यक्ति को अपना सामान्य या पत्र पहुंचा सकते थे।

भारत में पिन कोड को 9 ज़ोन में बांटा गया। जिसमें सेना के लिए एक अलग जोन बनाया गया। पिन कोड की शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई । जो केंद्रीय संचार मंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव श्रीराम भीकाजी वेलंकर ने की थी।

क्यों शुरू हुआ पिन कोड ?

हमारे देश में ऐसे कई राज्य हैं। जहां पर आपको कुछ नाम कॉमन मिल जाएंगे। कॉमन नाम मतलब रामपुर, रामनगर, और प्रेमनगर। साल 1972 से पहले लोग बिना कोई पिन कोड के अपना पत्र भेजते थे। जिससे उनका पत्र सही जगह पर नहीं पहुंच पाता था। इसके अलावा 1 जिले में एक ही नाम के कई गांव या कस्बे होने के कारण वह सही व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता था। जिसके बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई, और पिन कोड को अमल में लाया गया। जबकि अलग-अलग भाषाओं के कारण भी स्थिति असहज हो जाया करती थी. इन्हीं दिक़्क़तों का समाधान करने के लिए हर राज्य का एक विशेष कोड बनाया गया. जिसे हम पिन कोड के नाम से जानते हैं.

पिन कोड से जुडी कुछ खास बातें-

“कुल 6 अंकों वाले पिन कोड में शुरू से तीसरा अंक ज़िले के लिए होता है, जबकि आख़िरी के तीन अंक डाकघर के लिए होते हैं”

इन राज्यों को दिए गए हैं ये पिन कोड़

  • दिल्ली-11
  • हरियाणा – 12 और 13
  • पंजाब – 14 से 16 तक
  • हिमाचल प्रदेश – 17
  • जम्मू-कश्मीर – 18 से 19 तक
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड – 20 से 28 तक
  • राजस्थान – 30 से 34 तक
  • गुजरात – 36 से 39 तक
  • महाराष्ट्र – 40 से 44 तक
  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ – 45 से 49 तक
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना – 50 से 53 तक
  • कर्नाटक – 56 से 59 तक
  • तमिलनाडु – 60 से 64 तक
  • केरल – 67 से 69 तक
  • पश्चिम बंगाल – 70 से 74 तक
  • ओडिशा – 75 से 77 तक
  • असम – 78
  • पूर्वोत्तर – 79
  • बिहार और झारखंड – 80 से 85 तक

वहीं सेना डाक सेवा (एपीएस) के लिए 90 से 99 तक के कोड इस्तेमाल किये जाते हैं।

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