सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? जानें 10 खास कारण और रोचक कहानी

सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? और फिर मारने के लिए क्यों उतारू हो जाता है। आखिर सांड को लाल रंग से क्या समस्या है? और क्या कारण है कि वह लाल रंग देखकर ही बिगड़ता है? इस सवाल जवाब का जवाब जानने की बहुत सारे लोगों की तीव्र इच्छा हो रही होगी। कि आखिर लाल रंग में ऐसा क्या है? जो उसे देख कर सांड अपना आपा खो देता है। और फिर उसे मारने के लिए दौड़ पड़ता है। तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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ऋषि मुनि जैसे गुण, फिर क्यों भड़कता है सांड

सांड का दूसरा नाम बैल होता है, और बैल से मुंशी प्रेमचंद की “दो बैलों की कथा” याद आ जाती है। तो चलिए थोड़ी सी इस कथा के बारे में भी जान लेते हैं। मुंशी प्रेमचंद्र ने इनके स्वभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि, जिस प्रकार गधे में ऋषि मुनियों के स्वभाव होते हैं। जो खाने को दे दो खाले,  जो पीठ पर रख दो ले जाए, आपने गधे को कभी किसी को मारते हुए नहीं देखा। ठीक इसी प्रकार बैल का भी स्वभाव होता है।

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गाय को आपने कई बार मारते हुए देखा होगा, लेकिन बैल बहुत ही विपरीत परिस्थिति में मारते हैं। उन्हें इतनी जल्दी गुस्सा नहीं आती। इसीलिए मुंशी प्रेमचंद ने बैलों को ऋषि मुनि की संज्ञा दी है। लेकिन अब सवाल यह है कि बैल का सगा भाई सांड ऐसा कैसे कर सकता है?

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सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ?

सच तो यह है कि सांड या बेल या अन्य कोई जानवर किसी रंग के कपड़े पहने होने से या किसी रंग को देखकर भड़क ही नहीं सकता। क्योंकि सभी पशुओं की तरह सांड में भी कलर ब्लाइंडनेस होती है। यानी कि वह रंगों की पहचान नहीं कर सकता। फिर वह लाल रंग देखकर कैसे मार सकता है? यह बड़ा सवाल है। यदि आप अपनी याददाश्त पर जोर डालें तो आपने भी अपनी जिंदगी में कभी सांड या बैल को किसी लाल रंग के कपड़े पहने हुए को मारते नहीं देखा होगा। अब सवाल यह आता है कि यह बात कहाँ से सामने आई?

“सभी जानवरों की तरह सांड को भी कलर ब्लाइंड होता है, फिर वह क्यों भड़कता है”

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इसलिए भड़कता है सांड

कई देशों में ऐसे खेल खेले जाते हैं जिसमें लाल रंग के कपड़े को दिखाकर सांडों को भड़काया जाता है, लेकिन सच्चाई तो यह है कि कि लाल रंग देखकर सांड का भड़कना महज एक मिथक है। क्योंकि सभी पशुओं की भांति सांड भी कलर ब्लाइंड (वर्णांध) होते हैं, वे किसी रंग को देख ही नहीं सकते।

लाल रंग के प्रति उसके भड़कने का कारण सिर्फ लाल रंग के कपड़े को हिलाए जाने का तरीका है। जिस तरह से उसे ‍सांड के सामने लगातार हिलाया जाता है उससे वह भड़क उठता है और हिलाने वाले व्यक्ति की ओर दौड़ पड़ता है।

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इसलिए हमारे दिमाग में घुस घुस गई ये झूठी बात

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वहीं दूसरी तरफ सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि कई फिल्मों में इस तरह की सीन को दिखाया गया है। जिससे यह हमारे दिमाग में घर कर गया है। और हम यह जानने लगे कि सांड सच में लाल रंग देखकर भड़कता है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप किसी भी रंग के कपड़े या कुछ और चीज को एक खास तरह से यदि घूमाएंगे तो सांड भड़क जाएगा। फिर वह लाल हो या पीला हो या नीला हो या कैसे भी। तो शेयर करो और सब को बताओ।

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इंडिया मैच जीते या हारे, किसी का जन्मदिन हो या फिर किसी के घर मातम का माहौल, कोई खुश हो या फिर परेशान हो, किसी की लॉटरी लगी हो या फिर कोई कर्ज में डूबा हो। हाल चाहे जो भी हो, लेकिन दुनिया में सिर्फ एक ही ऐसी चीज है जो दोनों कंडीशन में इस्तेमाल की जा सकती है। और वह है शराब! लोग न सिर्फ शौक के लिए शराब पीते हैं। बल्कि रौआब के लिए भी शराब पीते हैं। खुशी में भी शराब पीते हैं, और दुख में भी शराब पीते हैं।

गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो जाए या फिर कोई लड़की प्रपोज एक्सेप्ट कर ले। पेग तो बनते हैं गुरु, लेकिन कभी यह सोचा कि यह शराब के पेग आखिर कांच के गिलास में ही क्यों बनते हैं?

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शराब को कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं ?

आखिर क्या दोस्ती है? शराब और कांच की प्यालो की। जो इन्हीं में शोभा देती है। तो चलिए आइए जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि लोग शराब को कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं? शराब जिसे हम देसी भाषा में दारु पी कहते हैं। इसे कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं? इसके दो कारण है। नंबर 1, “मनोवैज्ञानिक” और नंबर दूसरा “थर्मोडायनेमिक्स”.

अब आप सोच रहे होंगे कि यह भैया थर्मोडायनेमिक्स कौन सी नई बला है। यह तो हम जानते ही नहीं, तो भाईसाहब जब “थर्मोडायनेमिक्स’ जानेंगे तभी तो पता चलेगा कि लोग शराब को कांच के प्यालो या गिलास में क्यों पीते हैं?
इसके बजाय वह स्टील के गिलास या डिस्पोजल का भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन ऐसा वह केवल विषम परिस्थितियों में ही करते हैं। तो चलिए जान लेते हैं। शराब को कांच के गिलास में पीने का मनोवैज्ञानिक कारण क्या है?

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1. मनोविज्ञान

मनोविज्ञान– कांच के गिलास दिखने में स्टील या अन्य गिलास से ज्यादा अच्छे होते है। सोचिये अगर आप खुशी के वक्त शराब का मजा ले रहे है और अचानक आपका ध्यान जाता है स्टील के गिलास पर या प्लास्टिक के गिलास पर। क्या आपको वह आकर्षित करेगा? बेशक नही करेगा। और हो सकता है आपकी शराब पार्टी का मजा भी किरकिरा हो जाये।

और सोचिये अगर आपके सामने आकर्षक दिखने वाले कांच के गिलास में शराब रखी है। इससे आपको जरूर मन ही मन खुशी होगी। आपकी इच्छा बढ़ेगी।

कांच के गिलास में आप शराब की मात्रा भी देख सकते है। अगर आप अंदाजन 30/45/60 मिली शराब लेना चाहें तो इसमें आपको कोई दिक्कत नही आएगी। यही आपको स्टील के गिलास में शायद ही आसान लगे।

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2. थर्मोडायनामिक्स

थर्मोडायनामिक्स : हर कोई एक एक पेग ज्यादा समय तक एन्जॉय करना पसंद करते है। मतलब ज्यादा देर तक पेग ठंडा रहना चाहिए। इसमे कांच के गिलास अपनी अहम भूमिका निभा सकता है। कांच की अन्य वस्तु जैसे प्लास्टिक, स्टील या अन्य धातु से काफी कम है। जिससे कांच के गिलास में रखा हुआ पदार्थ काफी देर तक अपना तापमान मेन्टेन रख सकता है। मतलब ठंडी शराब जल्दी गरम नही होगी और ज्यादा देर तक मजा देगी।
यही कारण है कि बियर कांच के बोतल में ही मिलती है।

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