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नौकरी छोड़ इस शख्शियत ने उठाया बुंदेलखंडी महिलाओं के सशक्तिकरण का बीड़ा

नौकरी छोड़ इस शख्शियत ने उठाया बुंदेलखंडी महिलाओं के सशक्तिकरण का बीड़ा

झाँसी। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड क्षेत्र आजादी के बाद से ही राजनैतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। जिस कारण यहाँ विकास का पहिया उतनी तेजी से नहीं घूमा, जितना यहाँ की जरूरत थी। भारी खनिज सम्पदा से धनी यह क्षेत्र अभी भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। यहाँ के लोगों में अभी भी शिक्षा, रोजगार, जागरूकता और महिलाओं में सशक्तिकरण की कमी है। वहीं बची कुची कसर यहाँ लगातार पड़ने वाले सूखे ने कर दी है। जागरूकता के अभाव में यहाँ के किसानों ने फसलों में मात्रा से अधिक रसायनों का प्रयोग कर यहाँ भूमि को बंजर कर दिया है।

विकास के मुद्दे तो उठे, लेकिन…

सशक्तिकरण के अलावा उपरोक्त स्थितियों को लेकर तमाम समाचार चैनल्स, अखबारों, पत्रिकाओं में समाचार, लेख छपते रहे है, तो वहीं सरकारों ने इस ओर अपना रूख किया। लेकिन कहीं न कहीं इच्छा शक्ति में कमी तो कभी भ्रष्ट अधिकारियों की गन्दी मानसिकता के चलते बुन्देलखण्ड के अन्तर्गत आने वाले जनपदों में विकास का अभाव रहा। जिसका सीधा असर यहाँ के जनजीवन पर तो दिखा ही, साथ ही यहांँ के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।

माहिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी

Pragati rath jhansi

ऐसे में कुछ समाजसेवियों, (एन0जी0ओ0) स्वयं सहायता समूहों ने यहाँ के पिछड़े, शोषित समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का बीड़ा उठाया। जिससे अब कुछ हालात बदलते नजर आ रहे है। हमने ऐसे ही अमूल्य कार्य को अंजाम देने वाले स्वयं सहायता समूह (एन0जी0ओ0) व समाजसेवियों को समाज के सामने लाने का प्रयास कर रहा है। इस क्रम में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की ऐतिहासिक नगरी झाँसी से शुरू होकर पूरे बुन्देलखण्ड में समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार नये आयामों को स्थापित करने वाली एन0जी0ओ0 प्रगति रथ को गहराई से जानने की कोशिश हमने की है।
प्रगति रथ, शिक्षा, स्वास्थ्य, जैविक खेती, महिला सशक्तिकरण के साथ ही लोगों में छिपी हुई उनकी प्रतिभा को निखारकर उन्हें स्वावलम्बी बनाने का काम कर रही है। इस संस्था के प्रभाव से अब तक हजारों पुरूष, महिलायें एवं बच्चों को नये उज्जवल जीवन जीने की कल्पना सच्ची साबित हुई है।
संस्था की स्थापना, उद्देश्यों, कार्यक्षेत्र व लक्ष्यों की प्राप्ति के बारे में हमारे संवाददाता भूपेन्द्र रायकवार ने संस्था की निदेशक डा0 संध्या चौहान से विस्तृत बातचीत की।
इस दौरान संध्या चौहान  ने बताया कि संस्था का पूरा नाम प्रगति रथ स्वर्गीय ठाकुर शिवशंकर सिंह चौहान  शिक्षा विकास एवं समाजोत्थान समिति है। जिसका प्रधान कार्यालय नगरा प्रेमनगर स्थित सरसैय्यद नगर में स्थित है।
इसके अलावा कई ब्रांच शाखाएँ कार्यक्षेत्र को देखते हुए संचालित की जा रही है। जिसके अन्तर्गत बबीना, छतरपुर, शिवपुरी, पिछोर, करैरा, टीकमगढ़, फरीदाबाद आदि क्षेत्रों में संस्था की शाखायें सशक्तिकरण का कार्य कर रही हैं। संस्था के प्रमुख उद्देश्यों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों, बच्चों को शिक्षा दिलाकर उन्हें सुदृढ़ बनाने, लोगों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिये उनके हुनर को तराशने, महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें, रोजगार के लिये काबिल बनाने, तो वहीं कम-पढ़ी लिखी महिलाओं को आवश्यक सिलाई-कढ़ाई, बुनाई सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर उनका व उनकी संस्था का फोकस रहता है।
डा0 संध्या चौहान  ने बताया कि सशक्तिकरण के अलावा बुन्देलखण्ड के खेतों में कम पैदावार की समस्याओं को विभिन्न समाचार पत्र पत्रिकाओं में पढ़ने के बाद उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए जैविक खेती को भी अपनी संस्था के उद्देश्यों में शामिल किया। जिसके अन्तर्गत कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, विभिन्न कृषि आधारित पत्रिकाओं को अध्ययन करने के बाद उन्होंने अपनी संस्था सहयोगियों द्वारा लोगों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
कृषकों के समूह बनाकर उन्हें जैविक खाद से होने वाले फायदे बताये गये। तो वहीं कुछ खेतों पर किसानों की मर्जी से संस्था द्वारा जैविक खेती करायी गयी। जिसके अच्छे परिणामों को देखकर यहाँ के किसानों ने जैविक खेती को अधिक संख्या में अपना लिया व अपनाना शुरू कर कर दिया है। वर्तमान में खजराहा बुजुर्ग, राजगढ़, पनिहारी, टूँका, भंडरा, खजरा खुर्द, पनारी, टुनका, भडरा आदि क्षेत्रों में जैविक खेती जोर शोर से हो रही है।
उ0प्र0 के साथ मध्य प्रदेश शिवपुरी के पिछोर ब्लाॅक के ग्राम धौर्रा, नाँगुली, करई, डँगरिया, चिरवाई, खैत, बुड़ौन, उदयपुरा, बरेला, नीमचा, टोड़ी, विजयपुर, बक्सनपुर आदि 18 ग्रामों में किसान समूह बनाकर कृषिकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित कर उनके जीवन शैली को सुखमय बनाने का कार्य प्रगतिरथ ने किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बताते हुये संस्था की निदेशक डा0 सन्ध्या ने बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर बुन्देलखण्ड के विभिन्न जनपदों, ब्लाॅकों, ग्रामों में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता रहा है। जरूरतमंद लोगों को मुफ्त उपचार, दवा व आॅपरेशन कराने का जिम्मा संस्था अपने प्रारंभिक वर्ष से उठाती आ रही है। तो वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनकी बड़ी बीमारियों के आॅपरेशन भी संस्था ने कराये हैं। लाभार्थियों के नाम पूछने पर उन्होंने इस गैर  जरूरी बताया।
महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए डा0 सन्ध्या चौहान ने बताया कि संस्था के प्रधान कार्यालय एवं विभिन्न शाखा कार्यालयों पर महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, आत्मनिर्भर, बनाने के लिए संस्था प्रयासरत है। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, व्यूटीपार्लर, पर्सनालिटी डेवलपमेन्ट कोर्स कराकर उन्हें जिन्दगी के नये आयामों पर पहुँचाने का कार्य संस्था निरन्तर कर रही है।
इसके अलावा गरीब बच्चों को निःशुल्क पाठ्य व खाद्य सामग्री, पोशाक, विधवा महिलाओं, बुजुर्ग महिलाओं को आश्रय देने का काम भी संस्था के उद्देश्यों में शामिल है जो समय-समय पर किया जाता है।