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कटेरा : कृष्ण-सुदामा की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

कटेरा : कृष्ण-सुदामा की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

कटेरा:- कस्बे के सुरई सरकार मन्दिर में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के समापन अवसर पर भागवताचार्य देवेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का सुन्दर विस्तृत वर्णन सुनाया । कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा सुना कर वहा उपस्थित सैकड़ों भक्तों को भाव विभोर हो गए। सुदामा की दयनीय दशा और भगवान में निष्ठा के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं।
नगर सुरई सरकार मन्दिर में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के समापन अवसर पर देवेन्द्र कृष्ण शास्त्री वृद्वावन  श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का विस्तृत वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि यदि सुदामा दरिद्र होते तो अनके लिए धन की कोई कमी नहीं थी । सुदामा के पास विद्वता थी और धनार्जन तो सुदामा उससे भी कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे । वे आत्म कल्याण के लिए उधत थे। उन्होंने कहा कि भागवत जैसा ग्रंथ एक दरिद्र को प्रसन्नात्मा जितेंद्रिय शब्द से अलंक्रत नहीं कर सकता और जिसे भागवत ही परमशांत ही कहती हो उसे कौन दरिद्र घोषित कर सकता है। पत्नी के कहने पर सुदामा का द्वारिका आगमन और प्रभु द्वारा सुदामा के सत्कार पर शास्त्री बोले कि यह व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का सतकार है, यह चित की नहीं चरित्र की पूजा है । सुदामा की निष्ठा और सुदामा के त्याग का सम्मान है। कथा वाचक देवेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मित्रता में बदले की भावना का स्थान नहीं होना चाहिए।

भागवताचार्य ने भजनों के माध्यम से प्रभु की अतिकरूणा, कृपा वृष्टि की लीलाओं का श्रवण कर सभी श्रोता भावुक हो गए । इस दौरान कृष्ण-सुदामा की मनोहारी झांकी के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान कृष्ण के स्वरूप ने जैसे ही सुदामा बने स्वरूप के पैर धोए पांडाल में मौजूद श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान भजनामृत की फुहार पर श्रोताओं का तन-मन झूम उठा। इस मौके पर कथा श्रवण के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु कथा पांडाल में मौजूद थे।

रिपोर्ट:- भूपेन्द्र गुप्ता

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