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​छत्तीसगढ़ खुशहाली के मामले में अन्य राज्यों से बेहतर- रिपोर्ट

​छत्तीसगढ़ खुशहाली के मामले में अन्य राज्यों से बेहतर- रिपोर्ट

आज अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस (इंटरनेशनल हैपिनेस डे) है । संपूर्ण विश्व यानि की संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी 193 देश ‘अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस’ – को मानव के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का धोतक मानते हुए पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाता है। वर्ल्ड हैपिनेस रिपोर्ट – 2018 के मुताबिक भारत 4.1 हैपिनेस स्कोर के साथ 156 देशों के फेहरिस्त में 133वें स्थान पर है। किसी भी राज्य का हैपिनेस(खुशी) का स्तर को मापने के लिए सकल घरेलु उत्पाद प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक आजादी, सरकार में जनता का भरोसा, सामाजिक समर्थन, जीवन अवधि, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की मात्रा, गैरबराबरी आदि जैसे कारकों को मिला कर 10 अंकों का हैपिनेस इंडेक्स बनाया जाता है। इसीके आधार पर राज्य या देश की रेटिंग तय की जाती है। भले ही भारत का हैपिनेस इंडेक्स पहले से काफी नीचे आया हो पर छत्तीसगढ़ इस मसले में निरंतर प्रगति के पथ पर है।
वर्ष 2003 में छत्तीसगढ़ तीन साल के बालक के समान कमजोर, अविकसित था। इस वक्त राज्य का बजट मात्र रू. 7,328 करोड़ था और शिक्षा और स्वास्थ के दृष्टिकोण से भी पिछड़ा हुआ था। यहां प्राथमिक शालाओं की संख्या 13,852, हाई स्कूल 908 और हायर सेकेड्री स्कूल 680 थी। ऐसी स्थिति में डॉ. रमन सिंह ने रामराज्य के परिकल्पणा से प्रेरणा लेकर राज्य को उसी प्रगति के पथ पर ले जाने की ठान ली थी और दृढ़-निश्चयी होकर इस कार्य योजना पर काम करने लगे। जिसके कारण प्रदेश के स्थिति में उत्तरोत्तर प्रगति होते चली गई। इसका सकारात्मक परिणाम राज्य के सभी क्षेत्रों पर पड़ा। प्राथमिक स्कूलों की संख्या वृद्धि होकर 37,010 हो गई, हाई स्कूल 2643, वहीं हायर सेकेंड्री स्कूलों की संख्या 3,898 हो गया। वर्तमान में राज्य का बजट 87,000 करोड़ से अधिक है, पूरे भारत का सकल घरेलू उत्पाद जहां6.5 प्रतिशत है वहीं राज्य का सकल घरेलु उत्पाद 6.65 है। 2018-19 में राज्य की अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद रू. 3,25,644 करोड़ आंकी गई है जबकि2003 में  सकल घरेलू उत्पाद मात्र 47000 करोड़ था। प्रति व्यक्ति आय रू 12,000था जो वर्तमान में बढ़कर रू.92,035हो गया है,  लोगों की आय में 7.5 गुणा से भी अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। 
2003 के तुलना में राज्य में शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा जिसमें राज्य ने प्रगति नहीं की हो। ये प्रगति पिछले 15 सालों के अंदर ही हुई है। इन सबके पीछे जो सबसे बड़ा आधार बना वो लोक सुराज जैसी लोक कल्याणकारी अभियान, विकास यात्रा जिनसे लोक कल्याणकारी योजनाओं का जन्म हुआ – जैसे कि महतारी जतन योजना, मध्यान्य भोजन योजना, मुख्य मंत्री बाल सुरक्षा योजना, बेघरों के लिए मुख्य मंत्री आवास योजना के तहत घर,लड़कियों के लिए स्नातक की मुफ्त शिक्षा, सरस्वती साईकिल योजना, किसानों के लिए धान बोनस एवं फसल बीमा, अजजा के लिए लघु वनोपज पर समर्थन मूल्य, चरण पादुका वितरण, खाद्य सुरक्षा के लिए पीडीएस, बेघरों के लिए घर इत्यादि। इसे के पीछे का लक्ष्य एक ही है कि प्रदेश के साथ जनता उन्नति के पथ पर निरंतर अग्रसर होती रहे।
रही बात जनता के मध्य सरकार को लेकर असंतोष की, तो वो नहीं के बराबर है। लोक सुराज अभियान 2018 के दौरान सरकारी योजनाओं के क्रिन्यावन से संबंधी शिकायत का दर सिमटकर 2 प्रतिशत हो गया है। यह दर्शाता है कि सरकार में भ्रष्टाचार मात्रा में काफी कम है। छत्तीसगढ़ वो प्रदेश है जहां पर गांव से लेकर शहर तक 24 घंटे बिजली मिलती है। आज के युग में बिजली का उपयोग को खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। अतः यह कहा जा सकता है कि हैपिनेस इंडेक्स जिन मानकों के आधार पर तय किया जाता है, उस नजरिए से देखें तो छत्तीसगढ़ इन मानकों पर खरा उतरते हुए अन्य राज्यों की तुलना के में काफी बेहतर स्थिति में है।  

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