कप्तान साहब! कभी भी ढह सकता है थाना गुरसराय, हो सकता है जान-माल का नुकसान

झांसी का गुरसराय थाना जर्जर हालत में है। यहां रहने वाले पुलिस कर्मियों को कभी भी जानमाल का नुकसान हो सकता है। तीन दशक पहले बना यह थाना अब कभी भी ढह सकता है। थाने की छत के कोने का गिरा एक हिस्सा मानो उच्चाधिकारियों को बक्त रहते उचित व्यबस्था करने इशारा कर रहा है, बावजूद इसके अभी तक इसकी कोई खैर खबर नहीं है।


बीते कुछ दिन पहले गुरसराय थाने की छत का एक टुकड़ा अचानक जमीन पर आ गया। क्योंकि करीब 30 साल पहले बने गुरसराय थाने की इमारत अब इतनी जर्जर हो चुकी है। कि बारिश का पानी भी टप टप करने सरकारी और जरूरी कागजों और कम्प्यूटर इत्यादि सामान तक को खराब करने में कोई परहेज नहीं करता। ऐसे में कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। और थाने में दिन रात काम करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए जान आफत में पड़ सकती है।


19 जनवरी 1989 को गुरसरांय थाने का शिलान्यास झांसी के तत्कालीन पुलिस उपमहानिरीक्षक आरके पंडित ने झांसी के तत्कालीन एसएसपी ओपी मलिक की मौजूदगी में किया था। इस थाने को बने आज करीब 30 साल से भी ज्यादा का वक्त हो गया है। समय-समय पर भले ही इस थाने का जीर्णोद्धार होता रहा हो, और ऊपरी तौर पर एकदम चकाचक नजर आता हो, लेकिन अब यह पूरी तरह से जर्जर हालत में जा पहुंचा है। इसके छप्पर अपने आप ही गिरने लगे हैं। बावजूद इसके इसमें लगातार सरकारी काम-काज जारी है।

इसी बिल्डिंग में थाना पुलिस का कार्यालय, माल खाना थाना अध्यक्ष की केबिन और फरियादियों से मिलने के लिए जिस बरामदे में थाना अध्यक्ष महोदय की टेबल है वह भी इसी का हिस्सा है। यदि ऐसे में कोई घटना होती है तो जाहिर है माल के साथ जान की भी हानि हो सकती है। ऐसे में थोड़ी सी भी उच्च अधिकारियों की उदासीनता जान माल के लिए आफत बन सकती है।

गौरतलब है कि 2016 में तत्कालीन एसपी ग्रामीण दिनेश कुमार पी ने एक बार गुरसराय थाने का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने थाने की अंग्रेजी जमाने की बिल्डिंग जिसमें पुलिस कर्मियों के लिए भोजन बनाने की व्यवस्था थी। उसे ढहाकर पुनर्निर्माण किए जाने के निर्देश दिए थे, साथ ही थाने की इमारत के जीर्णोद्धार करने की बात कही थी।

आज यही अफसर एक बार फिर झांसी में एसएसपी बनकर वापस आए हैं, लेकिन अब तक यहां ना तो उस जर्जर बिल्डिंग को ढहा कर पुनर्निर्माण किया गया और ना ही थाने की इमारत का जीर्णोद्धार हुआ।

 

 

 

रिपोर्ट : आशुतोष नायक

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