गुरसराय में रिहायशी जमीनों पर खाकी की नजर, कहीं कब्जा, तो कहीं बनाने नहीं दे रहे भवन

गुरसरांय । अब तक थानों की चहारदीवारी के अंदर मामलों को रफा-दफा करवाने वाली खाकी की नजर अब रिहायशी इलाकों की जमीनों पर भी आ पड़ी है। हालत यह है कि कहीं खाकी की आड़ में सरकारी जमीन पर ही सरकारी आवास आवंटित करा लिया जा रहा है, तो कहीं पर दबंगई से लोगों को खुद की जमीन पर ही मकान बनाने से रोका जा रहा है।
दोनों मामले गुरसराय कस्बे से जुड़े हुए हैं। पहला मामला गुरसराय कस्बे के परकोटा मोहल्ला का है। आरोप है कि एक होमगार्ड ने प्रधानमंत्री आवास नगर पालिका की ही जमीन पर बनवा लिया। शिकायत करने पर बच्चों को उल्टे सीधे केस में फंसा देने की सीधी धमकी दी जाती है। नगर पालिका से लेकर संबंधित अधिकारियों से कई दफा शिकायत के बावजूद भी उसके खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जा रही है।

दूसरा मामला गुरसराय कस्बे के ही नई बस्ती वार्ड नंबर 14 का है। यहां के निवासी मुस्ताक का कहना है कि वह अपने पुश्तैनी मकान में छत का काम करवा रहा था। लेकिन पड़ोसी ने काम कर रहे मजदूरों को वहां से खदेड़ दिया। पीड़ित का आरोप है कि पड़ोसी के दो बेटे यूपी पुलिस में है, और इसी खाकी की दबंगई के बल पर उसके मकान के काम को रोका जा रहा है। पीड़ित ने तीन बार थाने से लेकर उप जिलाधिकारी गरौठा और क्षेत्राधिकारी महोदय से गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से भी बात की। नगरपालिका को कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वह खुद की जमीन पर काम करवा रहा है। लेकिन खाकी की दबंगई के चलते उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है, और खुद को जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

रिपोर्ट : राजकुमार कुशवाहा

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