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सरकारी स्कूल के आंकड़े मुँह जुबानी,निजी के तो साहब ही बताएंगे

सरकारी स्कूल के आंकड़े मुँह जुबानी,निजी के तो साहब ही बताएंगे

झाँसी। मऊरानीपुर की बेसिक शिक्षा आकंडों की जगह अनुमान पर चल रही है। कारण बी.आर.सी. कार्यालय में ए.बी.एस.ए. का ख्ुद समय से न बैठना और निवास झांसी होने के कारण कार से प्रतिदिन आना पडता है, कार्यालय ग्राम रुपाधमना के पास है।
कार्यालय बाबूओं ने जो आंकडे अनुमान में बताये उसके अनुसार मऊरानीपुर खण्ड ब्लाक की 66 ग्राम पंचायतों सहित लेकर नगरीय क्षेत्र के 195 सरकारी प्राईमरी बेसिक स्कूलों के अलावा दो अर्ध शासकीय जू.हा.स्कूल अलग से शामिल है।

बाबुओं के मुताबिक इतने हैं मऊरानीपुर में स्कूल

195 स्कूलों में कुल 458 शिक्षकों सहित लगभग छात्राकंन में 18 हजार बच्चों को बोझ अकेले ए.बी.एस.ए. पर है-कार्यालय में ’’अपने टाइम’’ पर आये सम्विदा लेखाकार जितेन्द्र कुमार दुबे के अलावा लेखाकार राजू तिवारी बताते है कि ब्लाक नगर सहित 195 सरकारी बेसिक स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के 136 विधालय है, जिनमें 15 नगरीय क्षेत्र में है बाकी 121 ग्रामीण क्षेत्र में है। 195 स्कूलों में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के 59 सरकारी जू.हा.स्कूल है जिनमें नगरीय क्षेत्र में महज 2 बाकी 57 ग्रामीण क्षेत्र में है। दो अर्ध शासकीय स्कूलों में ग्राम पृथ्वीपुर का छिरौल्या पूर्व माध्यमिक विधालय, ग्राम खदंरका का शंकर दयाल जू.हा.स्कूल है जो इसी कार्यालय से अटैच है।
सही अांकडों के हर सवाल का जबाब बाबूओ द्वारा जिस तरह दिया गया उससे साफ है कि सरकार के खजाने से प्रतिमाह बेशुमार रुपया आता है और अनुमानों के आधार पर कागजी आंकडों में समाहित हो जाता है।

BSA साहब के कार्यालय कम्प्यूटर फार्मेट में गायब हुए आंकड़े

यहां काबिले दाद कागज है न कि अफसर या बाबू-कारण यह कि कागज खामोशी से सब कुछ अपने समाहित कर लेते है। स्थानीय बेसिक शिक्षा के इस कार्यालय में हर सवाल का जबाब साहब के पास होता है और साहब मिलते नही,,,,,,? जानकारी के लिये जितने सवाल पूछे गये उनके जबाब में बाबू तोता रंटत की तरह साहब से बात करने की सलाह देते नजर आय,े यानी इनकी अपनी कोई जम्मेदारी नही। उस पर आकाशीय गाज गिरने से झांसी बी.एस.ए. कार्यालय के कम्प्यूटर फोर्मैट हो गये सो आंकडे चले गये यह बताया यहां के बाबू राजू तिवारी ने मऊरानीपुर के कार्यालय में……..?

निजी विद्यालय के बारे में तो साहब ही जानते है

जो सवाल पूंछे गये उनके जबाब में लगातार झोल आते गये और बातों में ही अहम खास बात यह निकलकर आई कि नगर व ग्रामीण क्षेत्र में बेशर्म के पौध की तरह रातों रात उगने वालें ऐसे कितने स्कूल है जो निजी है व इस कार्यालय से पंजींकृत है।
जबाब वहीं मिला कि यह सब जानकारी साहब के पास है- नाम न छापने की शर्त पर यहां के एक जानकार कुछ हद तक पटरी पर बात को लाते है बताते है कि हर नये स्कूल खोलने का आवेदन यहां से झांसी जाता है वहां से फिर यहां मौका मुआयना जांच के लिये आता है, यहां से साहब मौका मुआयना करते है कि खुलने वाले ऐेसे स्कूल में वह सब कुछ मानक है कि नही जो शिक्षा के कारोबार कों रात दिन आगे बढा रहे है तब कहीं हरी झण्डी देते है निजी स्कूलों की सूची जो पंजीकृत है वह साहब अपने पास रखते है……….?
कागज की शिक्षा के कारोबार-में नगर से लेंकर ग्रामीण क्षेत्रों में सैकडों निजी स्कूल की भरमार गली कूचों में होने के बाद भी लगातार ऐसे स्कूल खुलना बहुत कुछ ब्यां करता है जिसमें अहम कारण है एक बार स्कूल खोलने के बाद अधिकांश स्कूल निजी जागीर बन जाना, कुछ ऐसे नये नवेले स्कूलों के नाम बताये गये जो पंजीकत है या नही इसका जबाब फिर साहब के पाले में डाल दिया गया।
एक बैगलेस स्कूल जो आजकल चर्चा में है उसक बारे में यहां के स्टाफ को कुछ पता नही कि यह स्कूल मऊरानीपुर में है या नही, या फिर कागजों में चल रहा है ऐसे तमाम स्कूल के नाम की फेहरिश्त है, पर हकीकत कुछ और है, इसीलिये आज भी तमाम स्कूल दडबों जैसी जगह में चल रहे है जहां आपात के हालात बन जाये तो फस्टएड बाक्स भी नही है।
नगर से लेकर गांवों तक में बेसिक में शिक्षा के हालात बदतर है फिर भी सर्व शिक्षा अभियान चल रहा है जो महज छा़त्र छात्राओं के भबिष्य सो खुला खिलवाड कर रहे है आखिर क्यों……….? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो तो बेहिसाब स्कूलों में तालाबंदी तय है।

रिपोर्ट : रवि रठा