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झाँसी : शासन के निर्देशों की लगातार धज्जियाँ उड़ा रहे CBSE स्कूल, प्रशासन मौन
Jhansi: CBSE schools blown away from government guidelines

झाँसी : शासन के निर्देशों की लगातार धज्जियाँ उड़ा रहे CBSE स्कूल, प्रशासन मौन

झाँसी . जब कोई आम आदमी नियमों का उल्लंघन करता है तो प्रशासन का पूरा अमला अपनी पूरी रौ में आ जाता है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों द्वारा किए जाने वाले नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ रही है या सबकुछ जानने समझने के बाद भी प्रशासन ने अपनी आंखे बंद कर ली हैं।

नियमों के उल्लंघन में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूल आगे हैं। किसी भी प्रदेश में स्कूल खोलने के लिए स्कूल प्रबंधन को सीबीएसई के साथ ही संबंधित प्रदेश के शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना होता है। प्रमाण पत्र में विभिन्न नियमों का साफ शब्दों में उल्लेख होता है। प्रमाण पत्र लेते समय तो स्कूल प्रबंधन सभी नियम कायदों के पालन की हामी भर देते हैं, लेकिन बाद में अपनी मर्जी से चलते हुए नियमों का पु¨लदा रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं। स्कूल लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और जिला प्रशासन आज तक नोटिस जारी करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं कर सका है।

 

किन नियमों का करते हैं उल्लंघन :

नहीं रखते हैं सदस्य :

एनओसी में नियम है कि स्कूल की प्रबंध समिति में संबंधित मंडल के शिक्षा निदेशक के द्वारा नामित एक सदस्य को भी शामिल किया जाएगा। अधिकांश विद्यालय इस शर्त का पालन नहीं करते हैं। इसका कारण है कि स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में सदस्य भी शामिल होगा। इससे स्कूल प्रबंधन द्वारा किए जाने वाले सारे गोल-माल की जानकारी सदस्य के माध्यम से जिला प्रशासन को हो जाएगी।

नियम के सापेक्ष नहीं करते हैं प्रवेश :

नियम है कि स्कूल में उपलब्ध दस फीसद सीटों पर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के मेधावी बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। उन विद्यार्थियों से सरकारी दर पर निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। स्कूल ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देते हैं। यदि दबाव में कुछ को प्रवेश दे दिया तो उनसे अपने यहां पर निर्धारित शुल्क ही वसूलते हैं।

नहीं की जा सकती है पुस्तकों की बिक्री :

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का नियम है कि स्कूल परिसर में किताब या ड्रेस का वितरण नहीं किया जा सकता है। स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित होंगी। लेकिन स्कूल प्रबंधन के द्वारा न सिर्फ किताबों की बिक्री की जा रही बल्कि यह किताबें भी निजी प्रकाशकों की हैं।

नहीं करते हैं अभिभावकों से विचार विमर्श :

सीबीएसई का नियम है कि स्कूल प्रबंधन साल में एक बार ही फीस बढ़ा सकता है। लेकिन फीस बढ़ाने से पहले अभिभावकों से विचार विमर्श करना होगा। साथ ही अभिभावकों को विश्वास में लेकर ही फीस बढ़ाई जाएगी। लेकिन विद्यालयों के द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है।

अन्य मदों में नहीं वसूल सकते हैं शुल्क :

एनओसी में राज्य सरकार ने जो मद निर्धारित किए हैं। स्कूल प्रबंधन के द्वारा उससे इतर अन्य मदों में कोई शुल्क नहीं वसूला जा सकता है। लेकिन स्कूलों द्वारा विकास शुल्क, भवन शुल्क, वार्षिक शुल्क, छात्रवृत्ति फंड आदि मद में शुल्क लिया जा रहा है।

 

ग्राउंड रिपोर्ट : शुतोष नायक