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यदि आप भी रहते हैं बेबजह उदास, तो ये खबर है आपके लिए खास

यदि आप भी रहते हैं बेबजह उदास, तो ये खबर है आपके लिए खास

बहुत बार ऐसा होता है कि हम बैठे-बैठे कहीं खो जाते हैं और हमें खुद मालूम नहीं होता है कि हम क्या कर रहे हैं या कहां की सोच में डूबे हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो आपका अनुभव ज़रूर ऐसा रहा होगा कि आपने कई घंटे बिता दिए कुछ सोचते-सोचते और जब किसी ने टोका तो सोचते हैं कि क्या सोच रहे थे. ये आप भी नहीं जानते. अगर ऐसा होता है और आप इस परेशानी के शिकार हैं तो कृपया इस स्टोरी को पूरा पढ़ें… 

ऐसा अक्सर इंसान के साथ ज़िन्दगी के अलग-अलग दौर में होता है. किसी को टीनएज में, किसी को जॉब वाली उम्र में और किसी को उम्र के ढ़लते हुए वक़्त पर. लेकिन होता लगभग सभी के साथ है. 
अगर ऐसा आपके साथ नहीं होता है तो आप बहुत भाग्यशाली समझिए खुद को, क्योंकि जहां आधी दुनिया डिप्रेशन की शिकार है, वहीं इस बीमारी से भी कई लोग जूझ रहे हैं. इसी में भूलने की बीमारी भी शामिल है जो कभी-कभी इंसान को बहुत मायूस कर सकती है. आपको ऐसा लगता होगा कि आप भी नहीं जानते कि आप क्या सोच रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सच नहीं है।
दरअसल, आपका दिमाग़ आपके साथ एक गेम खेलता है. जहां आपको इस बात से अनजान करने की कोशिश करता है कि आप सोच क्या रहे हैं और आप जान-बूझकर उन ख्यालों को झुठलाने की कोशिश करते हैं जो आपको परेशान करते हैं. 

ऐसा अक्सर उन्हीं लोगों के साथ होता है जो ज़रूरत से ज़्यादा सोचते हैं, जिनकी आदत होती है कि वो हर एक बात को खूब गहराई से सोचते हैं. यहां तक कि किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते और खुद को ही परेशान करते हैं. 
आईये! अब जानने की कोशिश करते हैं कि ऐसे में करना क्या चाहिए. सबसे पहले आपको ये जानना है कि आप आमतौर पर किन चीज़ों के बारे में सोचते हैं या आपके दिमाग़ में सबसे ज़्यादा कौन सी चीज़ चलती रहती है
अब आपको कोशिश करनी है कि आप किसी दूसरी चीज़ के बारे में सोचें. जैसे अगर आपको किसी का कोई व्यवहार या कोई बात बुरी लगी है तो अब आपको इसके बजाय ये सोचना है कि आपको किसकी कौन सी बात अच्छी लगती है. यानी कि शुरू-शुरू में आप बिल्कुल इग्नोर करेंगे बुरी बातों को और फिर दूसरा स्टेप होगा लोगों को माफ़ करने की आदत डालना.

किसी को माफ़ करना हम सबको सबसे मुश्किल काम लगता है, लेकिन सच ये है कि किसी से नाराज़गी या नफ़रत रखकर हम अपना ही और भी ज़्यादा नुक़सान करते हैं. जब इंसान लोगों को माफ़ करना सीख लेता है तो उसकी बीमारियों सहित हर दुख-सुख में बदल जाता है. 
जैसे ही आपको कोई बात की फ़िक्र सताने लगी तो बस आप कोई किताब पढ़ने शुरू कर दीजिए या कहीं बाहर वक़्त बिताने निकल जाइये या अपने परिवार वालों के साथ बैठकर ठहाके लगाइये. आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपके खोये-खोये रहने की आदत में सुधार आ जायेगा. हो सके तो एकाग्र होकर बैठा करें और कुछ देर लंबी सांस लें, इससे तन और मन दोनों को शांति मिलती है.

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