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सबको इज्जत मिले और शोहरत मिले, खूब खुशियां मनाने की मोहलत मिले

सबको इज्जत मिले और शोहरत मिले, खूब खुशियां मनाने की मोहलत मिले

कटेरा (झाँसी) 149वें मेला जलविहार महोत्सव की चौथी रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के नाम रही। इस बार का कवि सम्मेलन जनसमूह को खूब रास आया।
कवियों की प्रस्तुतियों ने जनमानस के अन्तर्मन को छू लिया।

मेला जलविहार महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन का  उद्घाटन पूर्व विधायक प्रागीलाल अहिरवार व उनके साथ आये शाबिर अली ने दीप प्रज्वलित कर एवं फीता काट कर किया।
मुख्य अतिथि ने कहा कि कवि समाज को जाग्रत करने का काम करते है।
नगर अध्यक्ष मधुकर शाह बुन्देला, मेला संरक्षक राजेन्द्र बुन्देला, ओमप्रकाश लिपिक, धनीराम डबरया, महेश कटेरिया,  धर्मप्रकाश पाण्डेय, रुपेन्द्र राय, रविन्द्र साहू, कृष्णलाल आर्य, गंगाराम ट्रेलर, विनोद श्रीवास, नीतेश सोनी, नीलू गुप्ता, सुखनंदन वर्मा, जावेद हुसैन, महेश जैन मुख्य अतिथि का तिलक, माल्यापर्ण व बैच लगाकर पगड़ी पहनाकर स्वागत सम्मान किया।

उद्घाटन के बाद मंच कवियों के हवाले हो गया।
कवि सम्मेलन का दौर शुरू होकर तड़के तक चला।
राजस्थान की कवियत्री सपना सोनी ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन शुरुआत की। उनकी कविता “सबको इज्जत मिले और शोहरत मिले, खूब खुशियां मनाने की मोहलत मिले, पर मेरे मन मे एक तमन्ना यही, आपके नेह की दौलत मिले” सराही गयी।

राज घराने के उदय बुन्देला ने मंच के माध्यम से अपनी पहली बार कविता को सुनाया अपनी कविता ने उन्होंने कहा “में आया हु पानी में आग लगाने वो हारी हुई बाजी खुद को जिताने।

धीरेन्द्र विभु ने अपनी वीर रस की कविता में कहा “तिरंगा थामने वाले कभी हाँथो को काटा है, कटा कर सीस धड़ को भी कई टुकडों में बांटा है।
अशोक सुन्दरानी ने सभी को हसी को लोट पोट करते हुऐ जूते का दर्द सुनाया “हम कभी कपड़ो से मढे गए, किसी के बहुत प्यारे है तो हीरे में जड़े गये”
डीपी पारदर्शी जी ने अपनी कविता में कहा “गणपति बब्बा मोरिया ये तेरे देश मे क्या होरिया, दलित हस रया श्रवण रो रया”
अर्जुर सिंह चाँद ने कन्या भ्रूण हत्या पर लोगो के आंखों में से पानी निकाल दिया। संचालन सतीश मधुर ने किया।

रिपोर्ट- भूपेन्द्र गुप्ता

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