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जल सकंट जारी-कभी प्रतीक चिन्ह हुआ करते थे हैण्डपोस्ट नल

जल सकंट जारी-कभी प्रतीक चिन्ह हुआ करते थे हैण्डपोस्ट नल

मऊरानीपुर (झाँसी) पानी पर हाहाकार की नौबत के बीच जलसकंट लगातार चरम पर आता जा रहा है वहीं तमाम दावें और वायदों के बीच पिस रहे नगर वासी रात दिन पलिका के पानी टैकंरों का इंतजार करते है।

या यह कहा जा सकता है कि वर्तमान में जलापूर्ति लगभग नगर पालिका टैंकरों पर आश्रित होती जा रही है। वहीं वाटर लाइन जलापूर्ति के प्रतीक चिन्ह माने जाने वाले उम्रदराज हैण्डपोस्ट नल भी शो पीस बन गये।

नदी किनारे प्यासे हलक…?

कारण मुहल्लों में लगे हैण्डपम्प दम तोड चुके है पास लगे वाटर लाइन के सरकारी हैण्डपोस्ट पम्प नल भी ठप्प पडे है, जिसके चलते नदी किनारे रहनें वाले खुद प्यासे है।

ऐसे मिल पाता है पानी

जल सकंट सर्वे रिपोर्ट के क्रम में आज दोपहर-नगर के मुहल्ला चैकदमेला स्थित चर्चित, ऐतहासिक लठाटोर मंदिर के पास जैसे ही पालिका जल,टैंकर आया यहां के निवासी महिलायें युवक बर्तन लिये टूट पडे जिसके हाथ जितना पानी लगा ले गये।

ये है मुख्य समस्या

यहां के निवासी रिटायर्ड शिक्षक रमेश चंद्र वर्मा एवं नगर के चर्चित संगीतकार गायक श्याम लाल श्रीवास के अनुसार हैण्डपम्प लम्बे समय से खराब पडा हैं, सम्बंधित विभाग व उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन हैण्ड पम्प ठीक नही हो पाया।

यहां ध्वस्त है वाटर लाइन से जलापूर्ति का दावा

यहीं लगे सार्वजनिक हैण्डपोस्ट नल का हलक सूख गया पूरी गर्मी में अब तक एक बूंद पानी हैण्डपम्प में नही आया, बताया कि जल संस्थान द्वारा जलापूर्ति का दावा कितना हकीकत भरा हैं, यहां आकर देखा जा सकता है।

लठाटोर एवं रामलला मंदिर के श्रृद्वालु भी हो रहे परेशान

वहीं देश के कोने कोने से यहां स्थित लठाटोर मंदिर के दर्शन करने महिलायें पुरुष श्रृद्वालु भारी मात्रा में आते है उनके लिये पानी की व्यवस्था मंदिर की ओर से वर्तमान में की जा रही है।

यहां के हरिजन व पिछडा बाहुल्य क्षेत्र के निवासियों व मंदिर श्रृद्वालुओं के लिये गम्भीर जलसकंट देखते हुये तत्काल यहां के हैण्डपम्प को ठीक करवाने एवं हैण्डपोस्ट नल से जलापूर्ति कराये जाने की मांग की हैं।

कभी जलापूर्ति का प्रतीक चिन्ह हुआ करते थे हैण्ड पोस्ट नल

बताते चले कि हैण्ड पोस्ट जल संस्थान की ओर बर्ष 1962 में लगवाये गये थे, नगर में जलापूर्ति के समय कहीं पाइप लाइन पानी पैशर से न फट जाये इसके लिये नगर के तमाम क्षेत्रों में सार्वजनिक हैण्डपोस्ट पम्प लगवाये गये थे, हमेशा खुले रहने वाले उक्त नलों को कभी पानी जलापूर्ति का प्रतीक चिन्ह भी माना जाता था जो आज खुद प्यासे हैं।

रिपोर्ट- रवि अग्रवाल रठा

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