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नेता जी वोट मांगने तो आ रहे लेकिन बुन्देलियों का पलायन रोकने के लिए क्या किया आपकी सरकार ने
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नेता जी वोट मांगने तो आ रहे लेकिन बुन्देलियों का पलायन रोकने के लिए क्या किया आपकी सरकार ने

झाँसी। बीते दो दशक से बुंदेलखंड के लोड पलायन कर रहे रहे है। कोई दिल्ली तो कोई मुम्बई या अन्य शहरो का रुख कर रहा है ,क्योकि न तो किसी सरकार ने यहां की बेरोजगार लोगों  को रोजगार देने की सोची न ही यहां के किसानों को सबल बनाने की। हाँ एक चीज जरूर दी बाह है बेरोजगार भत्ता। काश सरकार के इस भत्ते से बेरोजगार अपने परिवार का पेट भर सकते।  जिससे हर रोज यहां से सैकड़ों लोग पलायन करने को बेबस और मजबूर है। जिसका जीता जगता उदाहरण बुंदेलखंड के प्रमुख रेलवे स्टेसन पर देखने को मिलता है। यहां मौजूद भीड़ रोजगार की तलाश में अपना घर छोड़कर गन्तव्य को जाने वाली ट्रेनों का इन्जार कटे देखे जा सकते है। कोई अपने परिवार समेत पलायन कर रहा है  कोई अकेली ही रोजगार की तलाश में निकाला है। ताकि वह अपने परिवार को दो बक्त की रोटी खिला सके। ऐसे में बुंदेलखंड में विकास करने की बात कहने पार्टियों के सारे दावों की पोल खुलती नजर आती है जन्होंने बीते दो दशक में यूपी समेत बुंदेलखंड के के इस हिस्से पर राज किया है।

बड़ा सवाल : …तो कब रुकेगा बुन्देखंडियों का पलायन

जी हाँ यह एक बड़ा सवाल है की आखिर कब  बुन्देलखंडियों का पलायन
रुकेगा ? कब बुंदेलखंडी अपने परिवार के साथ एक साथ बैठकर दो बक्त
का खाना खा सकेंगे। लगता है यह सवाल सवाल ही रहेगा क्योकि बीते
दो दशक में यूपी में कई कई सरकार आईं। लेकिन किसी ने इस गंभीर
मुद्दे पर बिचार नहीं किया। वहीं बुन्देलखंडियों का पलायन केंद्र की मनरेगा
को भी कटघरे में खड़ा करता है कि क्या सच में मनरेगा लोगों को
रोजगार देने में सक्षम है। और यदि है तो क्या घूमने या  मनाने जा रहे
इतने सारे लोग। अब किस पर भरोसा करें बुंदेलखंड के लोग। जो उनका
पलायन रोक सके। और जो लौटा सके उन बुन्देलियों को जो
पलायन कर है।

By ; Ashutosh nayak