सेमीफाइनल में धोनी को 7वें नंबर पर भेजने का फैसला पूरी टीम का था: रवि शास्त्री



लंदन. न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में महेंद्र सिंह धोनी को 7वें नंबर पर भेजने पर विवाद जारी है। इस पर अब भारतीय टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि यह पूरी टीम का फैसला था। सभी इस निर्णय के साथ थे। शास्त्री ने कहा, ‘पहली बात तो यह है कि उन्हें 7 नंबर पर भेजने का फैसला साधारण था। दूसरी बात यह कि क्या आप चाहते थेकि धोनी जल्दी जाएं और आउट होकर वापस चले जाएं। इससे लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद खत्म हो जाती।’

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू मेंशास्त्री ने कहा, ‘हमें धोनी के अनुभव की जरुरत बाद में थी। वे ऑलटाइम बेहतरीन फीनिशर हैं। उन्हें पहले उतारना एक अपराध होता। पूरी टीम इस निर्णय पर एकजुट थी।’ शास्त्री से पहले कोहली ने कहा था कि 45 मिनट के खराब खेल ने हमें बाहर कर दिया।

मध्यक्रम में मजबूत बल्लेबात की कमी खली : भारतीय कोच
मध्यक्रम में बेहतर बल्लेबाज की कमी को शास्त्री ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ‘मध्यक्रम में एक मजबूत बल्लेबाज की जरुरत है। टीम इंडिया को इसकी कमी खली। हालांकि, अब यह मामला अब भविष्य का है, क्योंकि हम वर्ल्ड कप में इस नंबर पर कुछ नहीं कर सके। राहुल पहले यहां थे, लेकिन धवन चोटिल हो गए। उसके बाद विजय शंकर का चोटिल होना बड़ा झटका था। हमइसेसंभाल नहीं पाए।’

सेमीफाइनल में 24 रन पर भारत के 4 विकेट गिर गए थे
सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को 240 रन का लक्ष्य दिया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत खराब रही थी। भारत के शीर्ष चार बल्लेबाज 10 ओवर के अंदर ही पवेलियन लौट चुके थे। टीम का स्कोर तब 24 ही था। रोहित शर्मा, विराट कोहली, लोकेश राहुल के बाद दिनेश कार्तिक भी आउट हो गए। पांचवें नंबर पर ऋषभ पंत और छठे पर हार्दिक पंड्या को भेजा गया था, लेकिन दोनों 32-32 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे।

सचिन-गांगुली ने की थी धोनी के 7वें नंबर पर भेजने के निर्णय की आलोचना
इसके बाद धोनी-रवींद्र जडेजा ने 116 रन की साझेदारी की थी। जडेजा 77 और धोनी 50 रन बनाकर आउट हुए। 49वें ओवर में धोनी के आउट होते टीम इंडिया की जीत की उम्मीदें खत्म हो गईं थीं। भारत 18 रन से मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया। इसके बाद धोनी को 7वें नंबर पर भेजने के फैसले को पूर्व क्रिकेटर्स ने खराब बताया। सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे कप्तानों ने इसकी आलोचना की थी। गांगुली ने इसे ‘टेक्टिकल ब्लंडर’ बताया था।

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रवि शास्त्री और महेंद्र सिंह धोनी।

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