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यहां पहली बार मासिक धर्म आने पर मनाते हैं उत्सव

यहां पहली बार मासिक धर्म आने पर मनाते हैं उत्सव

हमारे देश में आमतौर पर मासिक धर्म यानि की रज के बारे में खुलकर चर्चा नहीं की जाती है। लेकिन समय के साथ इस विषय को लेकर समाज के लोग धीरे-धीरे जागरुक हो रहे हैं। लेकिन, दक्षिण भारत में मौजूद आंध्रप्रदेश में किसी लड़की का पहला मासिक धर्म आने पर इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव ‘ऋतु कला समसकरम’ या ऋतुकला शुद्धि के नाम से जाना जाता है। इस उत्सव में घर की महिलाएं नृत्य करती हैं। पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

तमिल संस्कृति में यह उत्सव यौवन समारोह माना जाता है। उनका मानना है कि स्त्री ऊर्जा और महिला उत्पादक शक्ति को प्रदर्शित करती है। इसलिए उनकी पवित्र और खतरनाक प्रकृति के कारण इसे नियंत्रित करने की जरूरत होती है। मासिक धर्म शुरू हो जाने के बाद लड़की एक परिपक्व महिला बन जाती है। इसलिए इसे एक लघु विवाह समारोह की तरह खुशियों के साथ मनाया जाता है।

जिस कन्या को पहला मासिक धर्म हुआ है। पहले दिन उसे तेल तथा हल्दी लगने के बाद स्नान करवाकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। नये वस्त्र में साड़ियां पहनाई जाती है, साड़ी किशोरी को परिपक्व महिला की पहचान का संकेत करता है।– पश्चिम अफ्रीका के डागरा समुदाय भी किशोरी कन्‍याओं के 12 महीने के मासिक धर्म को वार्षिक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।

घाना के पूर्वोत्तर भाग के क्रोबो समुदाय में भी अप्रैल माह में यौवन उत्सव को ‘डिपो’ नाम के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इसमें किशोरियों को सजाया जाता है तथा उनके सिर के कुछ भाग के मुंडन के बाद उन्हें स्नान करवाया जाता है। जापान में स्त्री तथा पुरुष दोनों की यौवनावस्था को सेजिन शिखी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रीलंका में किशोर लड़कियों की यौवनावस्था को धूमधाम से मनाया जाता है। उनको नए कपड़े और पारंपरिक भोजन खिलाया जाता है।