मछला हरण : यह कहानी बुंदेलखंड के मैहर में स्थित मां शारदा भवानी के परम भक्त आल्हा की धर्मपत्नी मछला की है। जब 11 वीं सदी में पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह ने आल्हा की पत्नी मछला का हरण कर लिया। खास बात यह है कि यह सब ज्वाला सिंह देवी के सहयोग से किया। यह जानकर तो और भी अचम्भा होता है, कि वह देवी कोई और नहीं बल्कि आल्हा ऊदल की कुल देवी मां शारदा भवानी ही थी। ऐसे में मन में सवाल आता कि मां शारदा भवानी ने अपने परम भक्त आल्हा कि पत्नी मछला का हरण क्यों करवाया?

बुंदेलखंड में परंपरा है कि सावन के महीने में यहां की लड़कियां झूला झुलतीं हैं। एक दिन आल्हा की पत्नी मछला भी मचल गईं झूला झूलने को। और यहीं से शुरू होती है मछला हरण की कहानी। मछला हरण क्यों हुआ ? कब हुआ ? कैसे हुआ ? किसने किया ? इसके बारे में नटराज कैसेट ने इस पर पूरी फ़िल्म बनाई है। जिसमें पूरी गहराई से मछला हरण की कहानी पर बढे ही रोचक ढंग लोगों को बताया है। यहां हम आपको मछला हरण की कहानी मोटा माटी यानी संक्षेप में बताएंगे। और यदि आप ये ऐतिहासिक कहानी के बारे में विस्तार और मनोरंजक ढंग से जानना चाहते हैं तो हम नटराज कैसेत के सभी भाग भी यहीं देख सकते है।

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मछला हरण भाग 1 नटराज कैसेट

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आल्हा की मां यानी अपनी सास के लाख मना करने के बावजूद मछला बाग में झूला झूलने की जिद पर अड़ी रही। जिसके बाद आल्हा के छोटे भाई ऊदल रानी मछला को बाग़ में ले गए। चूंकि जिस बाग में रानी मछला झूला झूलने गई थी। वहीं से पथरीगढ़ राज्य की सीमा शुरू हो जाती है। तभी पथरीगढ़ का राजा ज्वाला सिंह वहां से निकला और उसकी नजर रानी मछला पर चली गई। जिसके बाद पथरीगढ़ का राजा ज्वाला सिंह का मन रानी मछला पर आ गया। वह हर कीमत पर मछला को पाना चाहता था। यहीं से उसने मछला हरण की योजना बनानी शुरू कर दी।

मछला हरण भाग 2 नटराज कैसेट

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जग जानता है कि आल्हा ऊदल की रक्षा उनकी कुलदेवी मैहर की मां शारदा भवानी करती हैं। इसलिए आल्हा की पत्नी मछला का हरण करना ज्वाला सिंह के लिए इतना आसान नहीं था। इसके लिए ज्वाला सिंह ने आल्हा ऊदल की कुलदेवी मैहर की मां शारदा भवानी को प्रसन्न करना शुरू कर दिया। और शर्त रखी कि यदि तुम मछला का हरण करने में मेरी सहायता करोगी। तो मैं मछला के पहले पुत्र की बलि चढ़ाउगा।

मछला हरण भाग 3 नटराज कैसेट

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पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह की यह बात सुनकर मां शारदा भवानी मछला हरण करने पर राजी हो गई। और रात में ही मछला का हरण करके पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह यहां मछला को पहुंचा दिया। सुबह हुआ तो सब सन्न रह गए। महोबा में हड़कंप मच गया। कि आखिर रानी मछला रातों-रात कहां चली गईं। रानी मछला की खोज में अलग-अलग सेना भेजी गई। लेकिन रानी मछला का कोई पता ना चला।

मछला हरण भाग 4 नटराज कैसेट

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इस दौरान रानी मछला की खोज कर रहे गिद्ध और गिद्धनी ने आखिरकार पता कर ही लिया। कि रानी मछला कहां है? इसकी जानकारी उन्होंने आल्हा उदल को दी। जिसके बाद तैश में आए ऊदल ने ज्वाला सिंह को खत्म करने की कसम खानी शुरू कर दी। और युद्ध की तैयारी करने की बात कही। इस पर आल्हा ने रोका और गिद्ध की बात की सच्चाई की पुष्टि करने के लिए ऊदल को दूसरे भेष में पथरीगढ़ भेजा।

मछला हरण भाग 5 नटराज कैसेट

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जब ऊदल ने इस बात की पुष्टि कर दी। कि रानी मछला पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह के चंगुल में है। तब वापस आकर उदल ने आल्हा को सारी बात बताई। इसके बाद युद्ध शुरू हुआ तो, ज्वाला सिंह ने आल्हा ऊदल की सारी सेना को पत्थर का बना दिया। ऐसे में एक बार फिर समस्या खड़ी हो गई।

मछला हरण भाग 6 नटराज कैसेट

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इस समस्या से निपटने के लिए आल्हा ने अपने बड़े बेटे इंदल को उसके चाचा मलखान के पास भेजा। इंदल ने वहां पहुंचकर सारी घटना की जानकारी दी। जिससे मलखान अवाक रह गए। और मलखान ने गुरु अमरा के पास जाकर उनसे मदद मांगी। लाख मना करने के बाद भी मलखान गुरु अमरा को अपने साथ ले आए। जहां पर गुरु अमरा ने पूजा पाठ शुरू की।

मछला हरण भाग 7 नटराज कैसेट

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गुरु अमरा की तपस्या के बाद मां शारदा भवानी ने आल्हा के सामने कहा कि उनकी पत्नी का अपहरण स्वयं उन्होंने किया है, और इसके बदले में उन्हें मछला के बड़े बेटे की बलि मिलेगी। तब आल्हा समेत सभी अवाक रह गये। लेकिन गुरु अमरा ने जब मछला के पहले बेटे की बलि चढ़ाने की बात कही। तो मैहर की शारदा भवानी प्रसन्न हो गई।

मछला हरण भाग 8 नटराज कैसेट

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शारदा भवानी को खुश करने के लिए और इस विकट समस्या से निपटने के लिए चाचा इंदल ने अपने भतीजेे और आल्हा के बड़े पुत्र इंदल की बलि चढ़ाई। इसके बाद खुश हुई देवी ने आल्हा को अमरता का वरदान दिया। और इंदल को जीवित कर दिया। पत्थर की बन चुकी सारी सेना को फिर से जीवित कर दिया। और पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह से युद्ध करने में आल्हा ऊदल और उनकी सेना की मदद करने का भी आशीर्वाद दिया। इसके बाद पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह और आल्हा ऊदल के बीच जमकर यह हुआ, और अंत में रानी मछला को वापस लाया गया।

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