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पत्रकारिता में क्रांति लाने वाले सख्स से Media और पत्रकार हुए बेख़बर

पत्रकारिता में क्रांति लाने वाले सख्स से Media और पत्रकार हुए बेख़बर

आप चाहें या ना चाहें तमाम न्यूज ऐप आपको दिन भर नोटिफिकेशन भेजकर दिनभर समाचार देते रहते हैं। दर्जनों न्यूज चैनल जबरन खबरें बनाकर परोस रहे हैं। अखबारों की तो गिनती ही नहीं है। लेकिन, एक दौर वो भी था जब सुदूर ग्रामीण इलाकों में अखबार ही सूचना का माध्यम थे, उस दौरान दो तारीख का अखबार लोगों तक पांच तारीख तक पहुंचता था। उस दौर में त्वरित खबरों का एक मात्र माध्यम रेडियो था। रेडियो तब स्टेटस सिंबल हुआ करत था। बिजली और बेटरी के अभाव में ग्रामीण इलाकों में तो इसकी कल्पना भी नहीं होती थी। उस दौर में एक वैज्ञानिक क्रांतिकारी बनकर उभरा। 13 मई 1937 में लंदन में जन्मे ट्रेवर ग्राहम बेलिस ने चाबी से चलने वाला रेडियो बनाया। एक बार चाबी भरने पर ये रेडियो 14 मिनट तक चलता था। उस दौर में संचार की दुनिया में बहुत बड़ी क्रांति थी। दुनिया के कई देशों में इस अविष्कार के बाद रेडियो पहुंचे और लोगों तक बीबीसी के रेडियो से खबरें सुनाई देने लगीं। संचार की दुनिया के इस महान क्रांतिकारी ने लंदन के इल पाई आइसलैंड में 05 मार्च को अंतिम सांस लीं। मुझ तक ये खबर नौ मार्च को पहुंची। जिस व्यक्ति ने संचार की दूरी कम करने का अविष्कार किया उसका जाना ही बेखबरी का शिकार हो गया। मुझे बड़ा दुख है कि देश, दुनिया की मीडिया में श्री बेलिस के महाप्रयाण की खबर सुनाई तक नहीं दी। कारण जो भी रहा हो, पत्रकारिता के विकास में महान योगदान देने वाले इन महान वैज्ञानिक को एक भारतीय पत्रकार की श्रद्धांजलि।
पत्रकार धर्मेंद्र कृष्ण तिवारी की फेसबुक वॉल से साभार

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