आपने अपनी जिंदगी में तमाम गाड़ी का और वाहन देखे होंगे। और उनमें अलग अलग तरह के फीचर्स भी। और सिस्टम भी देखे होंगे। यहां तक कि उनकी डिजाइन, रंग, रूप भी अलग अलग होती है। अलग-अलग कंपनी की अलग-अलग प्रकार की गाड़ी होती है। लेकिन एक वो खास बात जो हर किसी गाड़ी में एक ही जैसी होती है। वह है टायर। तो आज हम बात करेंगे टायर पर। कि आखिर किसी भी वाहन या गाड़ी का टायर काले रंग के क्यों होते है ? इसके पीछे आखिर क्या रहस्य है?

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गाड़ी कितने ही पहिए की क्यों ना हो? दो पहिए, चार पहिए, छह पहिए, 10, 20, 50 या फिर 100 कितने भी पहिए की गाड़ी हो। लेकिन टायर काले रंग के क्यों होते है। अच्छा एक बात तो आप जानते ही होंगे कि गाड़ी का टायर किस चीज का बना होता है? जी हां गाड़ी का टायर रबर का बना होता है। यह सभी लोग जानते हैं। लेकिन प्राकृतिक रबड़ तो सिलेटी कलर की होती है। फिर टायर काले रंग के क्यों होते है? यह एक रहस्यमई बात है। जिसे हर कोई नहीं जानता। तो आइए जानते हैं कि आखिर किसी की गाड़ी या वाहन के टायर का रंग काला क्यों होता है?

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टायर काले रंग के क्यों होते है

आमतौर पर रबड़ का टायर बनाने में कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे गाड़ी के टायर का रंग सिलेटी से काला हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हम वल्कनाइजेशन कहते हैं। टायर बनाने के दौरान रबर में कार्बन का उपयोग इस लिए किया जाता है। ताकि यह ज्यादा चले। यदि सादा रबर का टायर एक हिसाब से 10000 किलोमीटर तक चलता। तो इस में कार्बन मिलाकर टायर बनाने से यह टायर 1 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा चल सकने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि इसमें कार्बन मिलाया जाता है। और इसका रंग काला हो जाता है।

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टायर में ये वाला कार्बन होता है यूज

काले कार्बन कि भी कई श्रेणियां होती हैं और रबर मुलायम होगी या सख़्त यह इसपर निर्भर करेगा। कि कौन सी श्रेणी का कार्बन उसमें मिलाया गया है। मुलायम रबर के टायरों की पकड़ मज़बूत होती है। लेकिन वो जल्दी घिस जाते हैं जबकि सख़्त टायर आसानी से नहीं घिसते और ज्यादा दिन तक चलते है।

टायर में कार्बन के साथ यह भी मिलाते हैं।

टायर बनाते वक्त इसमें सल्फर भी मिलाया जाता है और कार्बन काला होने के कारण यह अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से भी बच जाता है। तो अब आप समझे की टायर का रंग हमेशा काला क्यों होता है ताकि आप का खर्चा भी कम हो और आपके टायर की लाइफ भी ज्यादा रहे। टायर काले रंग के क्यों होते है ।

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