ऐसा कोर्स चुनें जो पढ़ाई के साथ आपको जॉब के लिए भी तैयार करे

आधुनिक दौर में करियर की किसी भी फील्ड में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति में अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल्स के साथ प्रोफेशनल स्किल्स का होना भी जरूरी है। आज के आधुनिक दौर में प्रोफेशनल स्किल्स उतने ही जरूरी हैं जितनी किताबी नॉलेज। सिर्फ किताबी नॉलेज आपको नौकरी दिलाने के लिए काफी Read more…

इंजीनियरिंग कोर्सेज़ के लिए IIT के बाद LPU है बेहतर विकल्प

अगर विद्यार्थियों को आईआईटी में प्रवेश न मिल सके तो ऐसा नहीं है कि वे किसी अन्य उच्चकोटि के शिक्षण संस्थान से अपना इंजीनयरिंग कॅरियर शुरू ही नहीं कर सकते। देश में ऐसे कई विशिष्ट संस्थान हैं जो इंजीनियरिंग डिग्री पाने के लिए किसी भी तरह से आईआईटी से कम Read more…

B.Voc कोर्स देगा देश-विदेश में नौकरी के बेशुमार अवसर

हर कोई चाहता है कि उसे अपनी जिंदगी में एक अच्छी नौकरी मिल सके जिससे वह अपनी आवश्यकताओं के साथ- साथ अपने शौक को भी पूरा करने के योग्य बन सके। ऐसे में आजकल की युवा पीढ़ी का झुकाव विदेश में नौकरी करने की ओर रहता है ताकि वो अच्छी Read more…

वोकेशनल कोर्स से मिलेगा स्किल्ड मैनपावर, बढ़ेंगी रोजगार की संभावनाएं

पढ़ाई के साथ काम करने का हुनर अच्छी नौकरी की दावेदारी भी पक्की करता है। इसलिए आजकल वोकेशनल शिक्षा पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है, ताकि विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के हिसाब से ट्रेन किया जा सके। बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc) जैसे कई प्रोग्राम्स इसी तरह की शिक्षा पद्धति पर आधारित Read more…

सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? जानें 10 खास कारण और रोचक कहानी

सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? और फिर मारने के लिए क्यों उतारू हो जाता है। आखिर सांड को लाल रंग से क्या समस्या है? और क्या कारण है कि वह लाल रंग देखकर ही बिगड़ता है? इस सवाल जवाब का जवाब जानने की बहुत सारे लोगों की तीव्र इच्छा हो रही होगी। कि आखिर लाल रंग में ऐसा क्या है? जो उसे देख कर सांड अपना आपा खो देता है। और फिर उसे मारने के लिए दौड़ पड़ता है। तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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ऋषि मुनि जैसे गुण, फिर क्यों भड़कता है सांड

सांड का दूसरा नाम बैल होता है, और बैल से मुंशी प्रेमचंद की “दो बैलों की कथा” याद आ जाती है। तो चलिए थोड़ी सी इस कथा के बारे में भी जान लेते हैं। मुंशी प्रेमचंद्र ने इनके स्वभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि, जिस प्रकार गधे में ऋषि मुनियों के स्वभाव होते हैं। जो खाने को दे दो खाले,  जो पीठ पर रख दो ले जाए, आपने गधे को कभी किसी को मारते हुए नहीं देखा। ठीक इसी प्रकार बैल का भी स्वभाव होता है।

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गाय को आपने कई बार मारते हुए देखा होगा, लेकिन बैल बहुत ही विपरीत परिस्थिति में मारते हैं। उन्हें इतनी जल्दी गुस्सा नहीं आती। इसीलिए मुंशी प्रेमचंद ने बैलों को ऋषि मुनि की संज्ञा दी है। लेकिन अब सवाल यह है कि बैल का सगा भाई सांड ऐसा कैसे कर सकता है?

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सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ?

सच तो यह है कि सांड या बेल या अन्य कोई जानवर किसी रंग के कपड़े पहने होने से या किसी रंग को देखकर भड़क ही नहीं सकता। क्योंकि सभी पशुओं की तरह सांड में भी कलर ब्लाइंडनेस होती है। यानी कि वह रंगों की पहचान नहीं कर सकता। फिर वह लाल रंग देखकर कैसे मार सकता है? यह बड़ा सवाल है। यदि आप अपनी याददाश्त पर जोर डालें तो आपने भी अपनी जिंदगी में कभी सांड या बैल को किसी लाल रंग के कपड़े पहने हुए को मारते नहीं देखा होगा। अब सवाल यह आता है कि यह बात कहाँ से सामने आई?

“सभी जानवरों की तरह सांड को भी कलर ब्लाइंड होता है, फिर वह क्यों भड़कता है”

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इसलिए भड़कता है सांड

कई देशों में ऐसे खेल खेले जाते हैं जिसमें लाल रंग के कपड़े को दिखाकर सांडों को भड़काया जाता है, लेकिन सच्चाई तो यह है कि कि लाल रंग देखकर सांड का भड़कना महज एक मिथक है। क्योंकि सभी पशुओं की भांति सांड भी कलर ब्लाइंड (वर्णांध) होते हैं, वे किसी रंग को देख ही नहीं सकते।

लाल रंग के प्रति उसके भड़कने का कारण सिर्फ लाल रंग के कपड़े को हिलाए जाने का तरीका है। जिस तरह से उसे ‍सांड के सामने लगातार हिलाया जाता है उससे वह भड़क उठता है और हिलाने वाले व्यक्ति की ओर दौड़ पड़ता है।

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इसलिए हमारे दिमाग में घुस घुस गई ये झूठी बात

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वहीं दूसरी तरफ सांड लाल रंग देखकर क्यों भड़क जाता है ? इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि कई फिल्मों में इस तरह की सीन को दिखाया गया है। जिससे यह हमारे दिमाग में घर कर गया है। और हम यह जानने लगे कि सांड सच में लाल रंग देखकर भड़कता है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप किसी भी रंग के कपड़े या कुछ और चीज को एक खास तरह से यदि घूमाएंगे तो सांड भड़क जाएगा। फिर वह लाल हो या पीला हो या नीला हो या कैसे भी। तो शेयर करो और सब को बताओ।

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शराब को कांच के ही गिलास में क्यों पीते हैं, 10 फीसदी लोग ही जानते हैं प्याले में पैर लगाने का अनोखा कारण

शराब को कांच के ही गिलास में क्यों पीते हैं, 10 फीसदी लोग ही जानते हैं प्याले में पैर लगाने का अनोखा कारण

इंडिया मैच जीते या हारे, किसी का जन्मदिन हो या फिर किसी के घर मातम का माहौल, कोई खुश हो या फिर परेशान हो, किसी की लॉटरी लगी हो या फिर कोई कर्ज में डूबा हो। हाल चाहे जो भी हो, लेकिन दुनिया में सिर्फ एक ही ऐसी चीज है जो दोनों कंडीशन में इस्तेमाल की जा सकती है। और वह है शराब! लोग न सिर्फ शौक के लिए शराब पीते हैं। बल्कि रौआब के लिए भी शराब पीते हैं। खुशी में भी शराब पीते हैं, और दुख में भी शराब पीते हैं।

गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो जाए या फिर कोई लड़की प्रपोज एक्सेप्ट कर ले। पेग तो बनते हैं गुरु, लेकिन कभी यह सोचा कि यह शराब के पेग आखिर कांच के गिलास में ही क्यों बनते हैं?

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शराब को कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं ?

आखिर क्या दोस्ती है? शराब और कांच की प्यालो की। जो इन्हीं में शोभा देती है। तो चलिए आइए जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि लोग शराब को कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं? शराब जिसे हम देसी भाषा में दारु पी कहते हैं। इसे कांच के गिलास में ही क्यों पीते हैं? इसके दो कारण है। नंबर 1, “मनोवैज्ञानिक” और नंबर दूसरा “थर्मोडायनेमिक्स”.

अब आप सोच रहे होंगे कि यह भैया थर्मोडायनेमिक्स कौन सी नई बला है। यह तो हम जानते ही नहीं, तो भाईसाहब जब “थर्मोडायनेमिक्स’ जानेंगे तभी तो पता चलेगा कि लोग शराब को कांच के प्यालो या गिलास में क्यों पीते हैं?
इसके बजाय वह स्टील के गिलास या डिस्पोजल का भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन ऐसा वह केवल विषम परिस्थितियों में ही करते हैं। तो चलिए जान लेते हैं। शराब को कांच के गिलास में पीने का मनोवैज्ञानिक कारण क्या है?

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1. मनोविज्ञान

मनोविज्ञान– कांच के गिलास दिखने में स्टील या अन्य गिलास से ज्यादा अच्छे होते है। सोचिये अगर आप खुशी के वक्त शराब का मजा ले रहे है और अचानक आपका ध्यान जाता है स्टील के गिलास पर या प्लास्टिक के गिलास पर। क्या आपको वह आकर्षित करेगा? बेशक नही करेगा। और हो सकता है आपकी शराब पार्टी का मजा भी किरकिरा हो जाये।

और सोचिये अगर आपके सामने आकर्षक दिखने वाले कांच के गिलास में शराब रखी है। इससे आपको जरूर मन ही मन खुशी होगी। आपकी इच्छा बढ़ेगी।

कांच के गिलास में आप शराब की मात्रा भी देख सकते है। अगर आप अंदाजन 30/45/60 मिली शराब लेना चाहें तो इसमें आपको कोई दिक्कत नही आएगी। यही आपको स्टील के गिलास में शायद ही आसान लगे।

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2. थर्मोडायनामिक्स

थर्मोडायनामिक्स : हर कोई एक एक पेग ज्यादा समय तक एन्जॉय करना पसंद करते है। मतलब ज्यादा देर तक पेग ठंडा रहना चाहिए। इसमे कांच के गिलास अपनी अहम भूमिका निभा सकता है। कांच की अन्य वस्तु जैसे प्लास्टिक, स्टील या अन्य धातु से काफी कम है। जिससे कांच के गिलास में रखा हुआ पदार्थ काफी देर तक अपना तापमान मेन्टेन रख सकता है। मतलब ठंडी शराब जल्दी गरम नही होगी और ज्यादा देर तक मजा देगी।
यही कारण है कि बियर कांच के बोतल में ही मिलती है।

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पिन कोड क्या है ? पिन कोड लिस्ट और इसका रोचक इतिहास

पिन कोड क्या है,और हमें इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? ये क्या और किस काम में आता है। इसका क्या इतिहास है? यह सारी ऐसी बातें हैं, जो हमें जनरल नॉलेज के हिसाब से जानना बहुत जरूरी है। कई जिज्ञासु प्रवृत्ति के के लोग भी ऐसे तमाम सवालों के बारे में जानना चाहते हैं।

तो आइए जानते हैं कि आखिर हमें पिन कोड की आवश्यकता क्यों पड़ी? और इसे क्यों बनाया गया? यदि हमें कहीं के पिन नंबर को ढूंढना है। तो कैसे ढूंढे? और इसे देखकर कैसे पता लगाएं कि यह पिन कोड कहां का है? तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पिन कोड का रहस्य?

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पिन कोड क्या है ?

यह दुनिया कितनी बड़ी है। और इस बड़ी दुनिया में ना जाने कितने देश, राज्य, जिले, और शहर होंगे। यही नहीं इसमें लाखों-करोड़ों गांव भी होंगे। ऐसे में उन सभी को याद करना है बड़ी ही मुश्किल की बात थी। जिस तरह हमारी पहचान के लिए आधार कार्ड या पहचान पत्र होते हैं। मोबाइल नंबर की पहचान के लिए कंट्री कोड होते हैं। गाड़ियों की पहचान के लिए नंबर प्लेट होती है। ऐसे ही हर देश, राज्य, शहर और गांव की पहचान के लिए भी एक कोड होता है। जिसे भारत में पिन कोड कहा जाता है।

और आसान हुआ पत्रों का सही पते पर जाना

पिन कोड को अंग्रेजी में (पोस्टल इंडेक्स नंबर) कहा जाता है। यह 6 अंकों का नंबर होता है, और इस नंबर से राज्य की पहचान की जाती है। एक समय था जब पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी का बहुत अभाव था। लोग एक दूसरे से संपर्क साधने के लिए पत्रों का सहारा लेते थे। ऐसे में पत्र जिसे भेजा जाता था। वह उस तक पहुंच जाए। इसीलिए पिन कोड की व्यवस्था की गई थी। आप दुनिया की किसी भी कोने में बैठे हो। जिस किसी भी पत्र या सामान को आपको जिस व्यक्ति तक भेजना है। केवल उस पिन कोड के जरिए आप उस स्थान तक उस व्यक्ति को अपना सामान्य या पत्र पहुंचा सकते थे।

भारत में पिन कोड को 9 ज़ोन में बांटा गया। जिसमें सेना के लिए एक अलग जोन बनाया गया। पिन कोड की शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई । जो केंद्रीय संचार मंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव श्रीराम भीकाजी वेलंकर ने की थी।

क्यों शुरू हुआ पिन कोड ?

हमारे देश में ऐसे कई राज्य हैं। जहां पर आपको कुछ नाम कॉमन मिल जाएंगे। कॉमन नाम मतलब रामपुर, रामनगर, और प्रेमनगर। साल 1972 से पहले लोग बिना कोई पिन कोड के अपना पत्र भेजते थे। जिससे उनका पत्र सही जगह पर नहीं पहुंच पाता था। इसके अलावा 1 जिले में एक ही नाम के कई गांव या कस्बे होने के कारण वह सही व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता था। जिसके बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई, और पिन कोड को अमल में लाया गया। जबकि अलग-अलग भाषाओं के कारण भी स्थिति असहज हो जाया करती थी. इन्हीं दिक़्क़तों का समाधान करने के लिए हर राज्य का एक विशेष कोड बनाया गया. जिसे हम पिन कोड के नाम से जानते हैं.

पिन कोड से जुडी कुछ खास बातें-

“कुल 6 अंकों वाले पिन कोड में शुरू से तीसरा अंक ज़िले के लिए होता है, जबकि आख़िरी के तीन अंक डाकघर के लिए होते हैं”

इन राज्यों को दिए गए हैं ये पिन कोड़

  • दिल्ली-11
  • हरियाणा – 12 और 13
  • पंजाब – 14 से 16 तक
  • हिमाचल प्रदेश – 17
  • जम्मू-कश्मीर – 18 से 19 तक
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड – 20 से 28 तक
  • राजस्थान – 30 से 34 तक
  • गुजरात – 36 से 39 तक
  • महाराष्ट्र – 40 से 44 तक
  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ – 45 से 49 तक
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना – 50 से 53 तक
  • कर्नाटक – 56 से 59 तक
  • तमिलनाडु – 60 से 64 तक
  • केरल – 67 से 69 तक
  • पश्चिम बंगाल – 70 से 74 तक
  • ओडिशा – 75 से 77 तक
  • असम – 78
  • पूर्वोत्तर – 79
  • बिहार और झारखंड – 80 से 85 तक

वहीं सेना डाक सेवा (एपीएस) के लिए 90 से 99 तक के कोड इस्तेमाल किये जाते हैं।

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भारत के राज्यों के नाम 2 मिनट में सीखें, और जिंदगी भर याद रहेंगे, 100% ट्रिक

भारत के राज्यों के नाम आमतौर पर कक्षा 6 के बच्चों को सिखाए जाते हैं। कक्षा 6 के बच्चे इसे याद भी करते हैं,लेकिन जब तक वह हाईस्कूल, या इंटरमीडिएट तक पहुंचते हैं। तब तक वह भूल ही जाते हैं। ऐसे में तमाम नौकरियों की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स का क्या हाल होता होगा? इसका अंदाजा भी आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे में तमाम ऐसी ट्रिक्स हैं। जिनके जरिए हम बहुत ही आसानी से कुछ भी याद कर सकते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि कैसे हम 2 मिनट में भारत के राज्यों के नाम याद कर सकते हैं। वह भी जिंदगी भर याद रहेंगे।

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भारत के राज्यों के नाम सबको होते हैं याद पर भूल जाते हैं अक्सर

यदि सच बात कही जाए, तो हमें सभी राज्यों और इससे संबंधित तमाम प्रश्नों के उत्तर आते ही हैं। दावा है कि आपको सभी राज्यों के नाम जरूर आते होंगे। यह दावे के साथ कहा जा सकता है। लेकिन यदि आपसे कहा जाए कि आप एक बार में सभी राज्यों के नाम बताओ। तो शायद आप भूल जाएं। इसीलिए यहां एक ऐसी ट्रिक लाई गई है। जिससे आप भारत के राज्यों के नाम आसानी से याद कर सकते हैं, और इस तरीके से याद कर सकते हैं। कि फिर कभी आप भारत के राज्यों के नाम अपनी जिंदगी में नहीं भूलेंगे। तो क्या है वह ट्रिक? आइए जानते हैं।

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क्या है भारत के राज्य याद करने की ट्रिक?

यहां एक तुलसीदास की चौपाई उपयोग में लाई गई है। आपको बस इस चौपाई को याद करना है। और बस आपको याद हो गए सभी राज्यों के नाम। तो क्या है वह चौपाई? जिससे भारत के राज्यों के नाम याद किए जा सकते हैं देखिए.

राम नाम जपते अत्रि मत गुसिआउ
पंख में उगहमि अहि के छबिझाउ

इस चौपाई के एक-एक अक्षर से एक-एक राज्य का नाम है। इस चौपाई के आगे के अक्षर के हिसाब से आप आसानी से याद कर सकते हैं। यहां हम आपको हिंट भी दे रहे हैं। ताकि आपको कुछ कंफ्यूजन हो तो आप उसे भी याद कर सकते हैं।

  • रा से राजस्थान
  • म से मणिपुर
  • ना से नागालैंड
  • म से महाराष्ट्र
  • ज से जम्मू कश्मीर
  • प से पश्चिम बंगाल
  • अ से असम
  • त्रि से त्रिपुरा
  • म से मध्यप्रदेश
  • त से तमिलनाडु
  • गु से गुजरात
  • सि से सिक्किम
  • आ से आंध्र प्रदेश
  • उ से उत्तर प्रदेश
  • पं से पंजाब
  • क से कर्नाटक
  • में से मेघालय
  • उ से उत्तराखण्ड
  • ग से गुजरात
  • ह से हरियाणा
  • मि से मिजोरम
  • अ से अरुणांचल प्रदेश
  • हि से हिमांचल प्रदेश
  • के से केरल
  • छ स छत्तीसगढ़
  • बि से बिहार
  • झा जे झारखण्ड
  • उ से उड़ीसा

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सभी गाड़ियों के टायर काले रंग के क्यों होते है ? रोचक तथ्य

आपने अपनी जिंदगी में तमाम गाड़ी का और वाहन देखे होंगे। और उनमें अलग अलग तरह के फीचर्स भी। और सिस्टम भी देखे होंगे। यहां तक कि उनकी डिजाइन, रंग, रूप भी अलग अलग होती है। अलग-अलग कंपनी की अलग-अलग प्रकार की गाड़ी होती है। लेकिन एक वो खास बात Read more…

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