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जानें ! कैसे बढ़ाये बच्चों का आत्मविश्वास

जानें ! कैसे बढ़ाये बच्चों का आत्मविश्वास

अनामिका की उम्र 5 साल है । हाल ही में उसने स्कूल चेंज किया है । नए स्कूल में जब कुछ बच्चों ने उसे फैट गर्ल कहकर चिढाना शुरू किया तो इसकी शिकायत उसने घर आकर मम्मी पापा से की। जिसे सुनकर माता पिता के जेहन में आया कि उसकी क्लास टीचर को फोन करके एक्शन लेने को कहें। लेकिन कुछ सोच कर उन्होंने स्वयं को रोक लिया। उन्हें लगा कि उनके ऐसा करने से शायद प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी । पर वह बेटी में ऐसी परेशानी से स्वयं निपटने का हुनर विकसित करना चाहते थे । उन्होंने अनामिका से कहा कि जब स्कूल में कोई बच्चा ऐसा कमेंट करें तो उसे कहना कि पहली बात मैं फैट गर्ल नहीं हूं, और दूसरी बात अपने दोस्तों को इस तरह चिढाना अच्छी बात नहीं है । 

दूसरे दिन जब अनामिका स्कूल से आई तो उसका चेहरा खिला हुआ था। उसने बताया कि उन बच्चों ने अपने व्यवहार के लिए उस से माफी मांगी और अब कोई उसे अब कोई चिढ़ाता नहीं है। बच्ची मैं अपनी प्रॉब्लम को खुद साफ करने का आत्मविश्वास बढ़ गया। यह भविष्य के लिए उसे मिला सबक था कि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है। उसका यह आत्मविश्वास देखकर माता पिता भी प्रसन्न थे।

इसमें कोई शक नहीं कि बच्चे का हर कार्य करने में भले ही आपको खुशी मिलती है, पर उनमें आत्मविश्वास पैदा करने के लिए आपको उन्हें छोटी-छोटी जिम्मेदारियों तय करनी चाहिए । इन कार्यों का निर्धारण बच्चों की उम्र के अनुरूप करें । जैसे अगर बच्चा 5-6 साल का है तो उसे गमलों में पानी डालना, डिनर टेबल पर प्लेट लगाने का कार्य दे सकती हैं। सुबह जल्दी उठकर बिस्तर ठीक करने ,अपना बैग स्वयं तैयार करने को कह सकती है। अगर बच्चे की उम्र कम है तो उसे खेलने के बाद अपने टॉय को वास्केट में डालने को कह सकती हैं । यह बच्चा आपके पास आकर कहेगा कि मां मैंने दिया गया कार्य कर दिया। तो उसमें एहसास मजबूत होगा कि वह कार्य करने में सक्षम है । यही आत्मविश्वास हर दिन उसके भविष्य को आकार देगा।