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अचानक मोबाइल में सेव हुए यूआईडीएआई के इस रहस्यमयी नंबर का सच
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अचानक मोबाइल में सेव हुए यूआईडीएआई के इस रहस्यमयी नंबर का सच

हाल ही में लोगों की मोबाइल की कांटेक्ट डायरी में अचानक सेव हुए एक नंबर से सोशल मीडिया में हंगामा मचा हुआ है . दरअसल यह नंबर आधार कार्ड की कंपनी यूआईडीएआई का होना बताया जा रहा है . जिसके बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा , और अब यह सोशल मीडिया पर बखेड़ा रूप में सामने आ रहा है. बिना किसी परमिशन के लोगों के मोबाइल की कांटेक्ट डायरी में अचानक से आये इस नंबर से खलबली मच गई , और लोगों ने सोशल मीडिया पर इसको लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया है।

कैसे हुआ खुलासा ?

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब फ्रांस के एक हैकर ने यू आईडीएआई को ट्वीट करते हुए इससे संबंधित सवाल खड़े किए। फ्रांस के एलियट एंडरसन ने यूआईडीएआई को ट्वीट करते हुए लिखा कि कई लोग जिनके सर्विस प्रोवाइडर अलग हैं, आधार कार्ड है या नहीं ,एम आधार ऐप इंस्टॉल है या नहीं , उन्हें पता चलता है कि उनके कोंटेक्ट में एक नंबर सेव है । वह भी बिना उनकी जानकारी के , क्या बता सकते हैं कैसे?
इस सवाल के जवाब में यूआईडीएआई दिए ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है, और न ही उन्होंने किसी सर्विस प्रोवाइडर को यह नंबर मुहैया कराने के लिए कहा है । वहीं दूसरी तरफ टेलीकॉम कंपनियों ने भी इस से साफ इनकार करते हुए हाथ खड़ा कर दिया।

तो फिर कैसे आया यह नम्बर ?

ऐसे में अब यह सवाल राष्ट्रीय स्तर पर जा पहुंचा कि आखिर यह नंबर लोगों के मोबाइल तक कैसे पहुंचा? हालांकि इस मामले को स्वत संज्ञान में लेते हुए Google ने बताया कि हमारी आंतरिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2014 में यूआईडीएआई का तत्कालिक टोल फ्री नंबर और 112 डिस्ट्रिक्ट हेल्पलाइन नंबर अनजाने में उस Android सेट अप विजार्ड में कोड हो गए थे जो भारत में उपयोग के लिए आई एम को जारी किया गया था, और तब से यही सेट अप चल रहा है। फिर हर मोबाइल पर इसके पहुंच जाने का कारण यह है कि एक बार यूज़र की ऑनलाइन कांटेक्ट लिस्ट में नंबर जुड़ गया तो एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस पर भी यह नंबर देखता ही रहेगा

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